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सोमवार, जून 29, 2026

फ्रांस में भीषण गर्मी से हाहाकार, जानिए कितनी गर्मी झेल सकता है हमारा शरीर

डेस्क। यूरोप भीषण गर्मी (Heatwave) की लहर का सामना कर रहा है। फ्रांस में 24 जून से 27 जून के बीच तापमान बढ़ने की वजह से लगभग 1000 मौत दर्ज की गई हैं। इस त्रासदी ने एक बार फिर से इतनी ज्यादा गर्मी में इंसानों के जीवित रहने की सीमा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। आइए जानते हैं कि आखिर हमारा शरीर कितनी गर्मी झेल सकता है।

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दरअसल शरीर का औसत अंदरूनी तापमान लगभग 37 डिग्री सेल्सियस रहता है। जब बाहरी तापमान बढ़ता है तो शरीर अतिरिक्त गर्मी को बाहर निकलने और जरूरी अंगों को सुरक्षित रूप से काम करते रहने के लिए पसीने और उसके वाष्पीकरण पर निर्भर करता है। वैज्ञानिक वेट बल्ब तापमान जो गर्मी और नमी का मिला जुला असर है को हीट स्ट्रेस का सबसे सटीक पैमाना मानते हैं। 35 डिग्री सेल्सियस का वेट बल्ब वह अधिकतम सीमा मानी जाती है जिसमें इंसान जीवित रह सकता है।

पेन स्टेट यूनिवर्सिटी की रिसर्च से यह पता चलता है कि स्वस्थ युवा भी लगभग 31 डिग्री सेल्सियस के वेट बल्ब तापमान में 6 घंटे से ज्यादा समय तक जीवित रहने में मुश्किल का सामना कर सकता है। बुजुर्ग, बच्चों और पहले से बीमार लोगों को इससे भी पहले गंभीर खतरों का सामना करना पड़ सकता है।

ज्यादा नमी पसीने को ठीक से वाष्पित नहीं होने देती। इससे शरीर की गर्मी तेजी से बढ़ने लगती है। यही वजह है कि ज्यादा नमी के साथ 35 डिग्री सेल्सियस के आस-पास का तापमान, सूखी जलवायु में काफी ज्यादा तापमान की तुलना में ज्यादा खतरनाक हो सकता है। सूखी गर्मी में इंसान कुछ समय के लिए 50 डिग्री सेल्सियस से 55 डिग्री सेल्सियस के बीच का तापमान झेल सकता है लेकिन नमी वाली गर्मी में काफी कम तापमान पर भी जान जा सकती है।

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