नई दिल्ली। संसद (Parliament) का मानसून सत्र कल से शुरू हो चुका है। इस सत्र में सरकार अपने अहम विधेयकों को पास कराने की रणनीति बना चुकी है। इस बीच उन विधेयकों की लिस्ट सामने आ गई है जो सरकार इस बार मॉनसून सत्र में पेश कर सकती है।
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ये हैं बिल:
- इनकम-टैक्स (संशोधन) बिल, 2026 (एक अध्यादेश की जगह लेने के लिए)
- सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन बिल, 2026 (एक अध्यादेश की जगह लेने के लिए)
- जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) बिल, 2026
- राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) बिल, 2026
- सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) बिल, 2026।
इनकम-टैक्स (संशोधन) बिल, 2026:
यह बिल जून 2026 में जारी किए गए ‘इनकम टैक्स (संशोधन) अध्यादेश, 2026’ की जगह लेगा। इस बिल का मुख्य उद्देश्य विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) को सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) में निवेश, बिक्री या हस्तांतरण से होने वाली ब्याज आय और कैपिटल गेंस पर आयकर से छूट देना है।
सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन बिल, 2026:
इस विधेयक के तहत सुप्रीम कोर्ट के स्वीकृत न्यायाधीशों की कुल संख्या 34 से बढ़ाकर 38 (मुख्य न्यायाधीश यानी CJI समेत) करने का प्रावधान है। यह विधेयक सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 में संशोधन करता है। इसके तहत CJI को छोड़कर अन्य न्यायाधीशों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 की जाएगी।
जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) बिल, 2026:
इस बिल का मुख्य उद्देश्य जन्म और मृत्यु के देरी से होने वाले पंजीकरण (Delayed Registration) के नियमों को अधिक सख्त और पारदर्शी बनाना है। यह बिल मूल अधिनियम की धारा 13(3) में संशोधन का प्रस्ताव करता है। नए प्रावधानों के अनुसार, यदि किसी जन्म या मृत्यु की सूचना घटना के दो साल बाद दी जाती है, तो उसका पंजीकरण केवल ‘प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट’ (First-Class Judicial Magistrate) के आदेश पर ही हो सकेगा।
राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) बिल, 2026:
इस बिल का मुख्य उद्देश्य भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के अपमान या इसे गाए जाने में बाधा डालने को दंडनीय अपराध बनाना है। यह संशोधन 1971 के मूल अधिनियम में बदलाव करके ‘वंदे मातरम’ को वही वैधानिक सुरक्षा प्रदान करता है जो राष्ट्रगान (जन-गण-मन), राष्ट्रीय ध्वज और संविधान को प्राप्त है।
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) बिल, 2026:
यह बढ़ती महंगाई और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार को देखते हुए एमएसएमई के निवेश (Investment) और टर्नओवर की सीमाओं को समय-अनुकूल और व्यावहारिक बनाने का प्रस्ताव है। सूक्ष्म और छोटे उद्योगों को बिना किसी जटिल कानूनी बाधा के आसानी से संस्थागत क्रेडिट/लोन उपलब्ध कराने के लिए डिजिटल वेरिफिकेशन और आसान कागजी प्रक्रियाओं को बढ़ावा देना; यह भी इस बिल में प्रस्तावित है।
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