डेस्क। दुनिया के इतिहास में कई ऐसे युद्ध (war) हुए हैं जो वर्षों या दशकों तक चले। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इतिहास में एक ऐसी जंग भी लड़ी गई थी जो दिनों या घंटों में नहीं, बल्कि महज 38 मिनट में खत्म हो गई थी? इस युद्ध को इतिहास में ‘एंग्लो-जांजीबार युद्ध’ (Anglo-Zanzibar War) के नाम से जाना जाता है।
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आइए जानते हैं कि आखिर क्यों और कैसे लड़ी गई थी यह दुनिया की सबसे छोटी लड़ाई:
युद्ध का मुख्य कारण: सुल्तान की जिद
यह घटना 27 अगस्त 1896 की है। पूर्वी अफ्रीका के जांजीबार (Zanzibar) द्वीप के ब्रिटिश समर्थक सुल्तान हमद बिन थुवैनी की अचानक मृत्यु हो गई। उनकी मौत के तुरंत बाद उनके चचेरे भाई खालिद बिन बरघश ने अंग्रेजों की मर्जी के खिलाफ जाकर खुद को नया सुल्तान घोषित कर दिया।

अंग्रेजों के साथ हुई एक पुरानी संधि के अनुसार, जांजीबार का नया राजा वही बन सकता था जिसे ब्रिटिश कौंसल की मंजूरी मिले। अंग्रेजों ने खालिद को तुरंत गद्दी छोड़ने और महल खाली करने की चेतावनी दी। लेकिन खालिद ने इस अल्टीमेटम को नजरअंदाज कर दिया और महल की सुरक्षा के लिए करीब 3,000 सैनिकों को तैनात कर दिया।
38 मिनट का भीषण एक्शन:
ब्रिटिश सेना ने खालिद को 27 अगस्त की सुबह 9 बजे तक का समय दिया था।
जब तय समय तक खालिद ने आत्मसमर्पण नहीं किया,
तो ठीक 9:02 बजे ब्रिटिश नौसेना के युद्धपोतों ने सुल्तान के महल पर तोपों से भीषण बमबारी शुरू कर दी।
ब्रिटिश तोपों के सामने सुल्तान के पारंपरिक हथियार और लकड़ी का महल टिक नहीं सके।
पूरा महल कुछ ही मिनटों में आग की लपटों में घिर गया।
सुबह 9:40 बजे सुल्तान के सैनिकों ने झंडा झुकाकर आत्मसमर्पण कर दिया।
इस तरह यह युद्ध मात्र 38 मिनट में समाप्त हो गया।
युद्ध का परिणाम और नुकसान:
इस छोटी सी अवधि में जांजीबार के लगभग 500 सैनिक और नागरिक मारे गए या घायल हो गए। इसके विपरीत, आधुनिक हथियारों से लैस ब्रिटिश सेना का केवल एक सैनिक घायल हुआ था।
सुल्तान खालिद बिन बरघश बमबारी शुरू होते ही महल के पिछले दरवाजे से भाग निकला और जर्मन दूतावास में शरण ले ली। इसके बाद अंग्रेजों ने अपनी पसंद के सुल्तान हमूद बिन मोहम्मद को गद्दी पर बैठाया और जांजीबार पर अपना पूरा नियंत्रण स्थापित कर लिया।
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