तोरई के पत्तों पर क्यों रखते हैं जितिया व्रत का भोग? हैरान करने वाली है वजह

डेस्क। हिंदू धर्म में जितिया व्रत (जीवित्पुत्रिका व्रत) का अत्यंत विशेष महत्व माना गया है। यह पावन व्रत महिलाएं अपनी संतान की लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य, सुरक्षा और सुखी जीवन की कामना के लिए रखती हैं। तीन दिनों तक चलने वाले इस कठिन व्रत में भगवान जीमूतवाहन की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है।

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जितिया पर्व (Jitiya Vrat) की शुरुआत नहाय-खाय के साथ होती है। इस पूरे व्रत के दौरान और विशेषकर पूजा के समय तोरई (झिंगी) के पत्तों का प्रयोग अनिवार्य रूप से किया जाता है। आइए जानते हैं कि आखिर क्यों तोरई के पत्तों पर ही भगवान को भोग अर्पित किया जाता है।

तोरई के पत्तों का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं और प्राचीन परंपराओं के अनुसार, तोरई के पत्तों को अत्यंत शुद्ध और पवित्र माना गया है।

शास्त्रों में वर्णित कथाओं और लोक परंपराओं के अनुसार,

जितिया व्रत में तोरई के पत्तों का इस्तेमाल करने से पूजा पूर्ण और सफल मानी जाती है।

  • पवित्रता का प्रतीक:
  • तोरई की बेल और इसके पत्ते प्राकृतिक रूप से बेहद स्वच्छ और शुद्ध माने जाते हैं।
  • इसलिए भगवान जीमूतवाहन को अर्पित किया जाने वाला नैवेद्य या भोग किसी बर्तन के बजाय तोरई के पत्तों पर ही रखा जाता है।
  • सदियों पुरानी परंपरा:
  • बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में जितिया व्रत के दौरान तोरई के पत्तों पर ही पितरों और भगवान को भोजन अर्पित करने की परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है।

नहाय-खाय और भोग की परंपरा

पर्व के पहले दिन नहाय-खाय पर महिलाएं स्नान ध्यान के बाद पूरी तरह से सात्विक भोजन तैयार करती हैं।

इस दिन विशेष रूप से नोनी का साग, मड़ुआ (रागी) की रोटी, तोरई की सब्जी और कद्दू की सब्जी बनाई जाती है।

तैयार किए गए इन सभी व्यंजनों को सबसे पहले तोरई के साफ पत्तों पर सजाकर भगवान जीमूतवाहन, चील और सियारिन (व्रत की कथा से जुड़े प्रतीक) को भोग के रूप में अर्पित किया जाता है। इसके बाद ही व्रती महिलाएं स्वयं भोजन ग्रहण करती हैं।

भगवान जीमूतवाहन की मिलती है विशेष कृपा

माना जाता है कि नियमों का पालन करते हुए तोरई के पत्तों पर भोग लगाने से भगवान जीमूतवाहन प्रसन्न होते हैं।

  • संतान की सुरक्षा:
  • इस विधि से पूजा करने पर बच्चों को अकाल मृत्यु के भय और गंभीर संकटों से सुरक्षा मिलती है।
  • तरक्की और अच्छी सेहत:
  • भगवान जीमूतवाहन के आशीर्वाद से बच्चों का शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य उत्तम रहता है,
  • उनके करियर में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और जीवन में सफलता के नए मार्ग खुलते हैं।

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