इस गीतकार के लिखे गाने गाते थे लता मंगेशकर-रफी, नेहरू के खिलाफ लिखने पर हुई थी जेल

एंटरटेनमेंट डेस्क। हिंदी सिनेमा को ‘पहला नशा’ और ‘चला जाता हूं’ जैसे सदाबहार गाने देने वाले मशहूर शायर व गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी (Majrooh Sultanpuri) की कहानी बेहद दिलचस्प है। उन्होंने अपने करियर में 300 से ज्यादा सुपरहिट गाने लिखे, जिन्हें लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी जैसे दिग्गजों ने अपनी आवाज से अमर बना दिया।

यह भी पढ़ें-आधी रात को रिकॉर्ड हुआ था लता मंगेशकर का ये गाना, छोटी बहन संग गाया था गीत

शुरुआती सफर और बॉलीवुड में एंट्री:

1 अक्टूबर 1919 को सुल्तानपुर में जन्मे मजरूह सुल्तानपुरी ने अपने करियर की शुरुआत गज़लों और शायरी से की थी। साल 1946 में आई फिल्म ‘शाहजहां’ से उन्होंने बॉलीवुड में बतौर गीतकार कदम रखा। इसके बाद उन्होंने ‘मेहंदी’, ‘अंदाज’ और ‘आरजू’ जैसी कई चर्चित फिल्मों के लिए गाने लिखे और अपनी खास पहचान बनाई।

नेहरू के खिलाफ लिखी थी कविता:

जैसे-जैसे मजरूह साहब को लोकप्रियता मिली, उनके वामपंथी रुझान ने उन्हें मुश्किलों में डाल दिया। साल 1948 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की कोलकाता कांग्रेस के बाद देशभर में कम्युनिस्ट नेताओं की गिरफ्तारियां शुरू हुईं। मजरूह सुल्तानपुरी ने एक जनसभा में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की नीतियों के खिलाफ कविता पढ़ी थी। उन्होंने नेहरू की तुलना हिटलर से करते हुए उन्हें ‘कॉमनवेल्थ का दास’ कह दिया था।

माफी मांगने से किया साफ इंकार:

सत्ता विरोधी कविता लिखने के कारण सरकार ने उनसे माफी मांगने को कहा। हालांकि, अपने सिद्धांतों के पक्के मजरूह सुल्तानपुरी ने माफी मांगने से साफ इंकार कर दिया। इसके नतीजे में उन्हें अभिनेता बलराज साहनी के साथ करीब दो साल के लिए आर्थर रोड जेल भेज दिया गया। जेल में रहने के दौरान उनके परिवार को भारी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा।

गुरु दत्त की फिल्म से धमाकेदार कमबैक:

जेल से रिहा होने के बाद साल 1953 और 1954 में गुरु दत्त की फिल्मों ‘आर पार’ और ‘बाज़’ से उन्होंने नए सिरे से वापसी की। ‘बाबूजी धीरे चलना’, ‘कभी आर कभी पार’ और ‘सुन सुन जालिमा’ जैसे गानों ने चार्टबस्टर बनकर तहलका मचा दिया।

इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

हर दौर में बिखेरा अपनी कलम का जादू:

मजरूह सुल्तानपुरी ने हर दशक के संगीत प्रेमियों के दिलों पर राज किया:

  • 70 और 80 का दशक:
  • ‘अरे जा रे हट नटखट’ और ‘पापा कहते हैं बड़ा नाम करेगा’ जैसे यादगार गीत लिखे।
  • 90 का दशक:
  • ‘पहला नशा’, ‘यहां के हम सिकंदर’ और ‘ए काश के हम’ जैसे रोमांटिक गानों से युवाओं को अपना दीवाना बनाया।

अपनी निडर शायरी और लाजवाब गीतों के जरिए मजरूह सुल्तानपुरी आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में जिंदा हैं।

Tag: #nextindiatimes #MajroohSultanpuri

RELATED ARTICLE