लाइफस्टाइल डेस्क। बार-बार होने वाला मूत्र संक्रमण (UTI) एक दर्दनाक और असुविधाजनक समस्या है जो लगभग 20 से 30 प्रतिशत महिलाओं को प्रभावित करती है। अक्सर हम यही मान लेते हैं कि UTI सिर्फ और सिर्फ साफ-सफाई न रखने का नतीजा है, लेकिन मेडिकल साइंस के अनुसार, महिलाओं में बार-बार होने वाले UTI के पीछे उनके शरीर में हो रहे हार्मोनल बदलाव एक बहुत बड़ी वजह हो सकते हैं, जिस पर अक्सर किसी का ध्यान ही नहीं जाता।
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महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन एक बहुत ही अहम रोल निभाता है। यह न सिर्फ रिप्रोडक्टिव हेल्थ को दुरुस्त रखता है, बल्कि यूरिनरी ट्रैक्ट और वैजाइनल हेल्थ की भी सुरक्षा करता है। एस्ट्रोजन का स्तर सही होने पर वैजाइना में ‘लैक्टोबैसिलस’ नाम के अच्छे और फायदेमंद बैक्टीरिया पर्याप्त मात्रा में होते हैं। ये बैक्टीरिया इन्फेक्शन फैलाने वाले कीटाणुओं को पनपने से रोकते हैं।
ये भी हैं कारण:
मेनोपॉज, पेरिमेनोपॉज, डिलीवरी के बाद या कुछ अन्य हार्मोनल समस्याओं के दौरान शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर गिर सकता है। इससे यूरिनरी ट्रैक्ट और वैजाइना की सुरक्षा परत कमजोर पड़ जाती है और अच्छे बैक्टीरिया कम होने लगते हैं। इसका फायदा उठाकर इन्फेक्शन वाले बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं और UTI का खतरा बढ़ जाता है। स्टडीज भी इस बात की ओर इशारा करती हैं कि एस्ट्रोजन की कमी से शरीर की इन्फेक्शन से लड़ने की नेचुरल ताकत पर बुरा असर पड़ता है।

अगर किसी महिला को 6 महीने में 2 या उससे ज्यादा बार यूटीआई हो, या 1 साल में 3 या उससे ज्यादा बार यूटीआई हो… तो इसे ‘रिकरेंट यूटीआई’ कहा जाता है। ऐसी स्थिति में बार-बार सिर्फ एंटीबायोटिक्स खा लेना ही सही इलाज नहीं है। डॉक्टर द्वारा यह जांचना भी जरूरी हो जाता है कि कहीं इसके पीछे हार्मोनल कारण, डायबिटीज या ब्लैडर के पूरी तरह खाली न होने जैसी समस्याएं तो नहीं हैं।
अगर आप भी बार-बार होने वाले यूटीआई का शिकार हो रही हैं, तो हर बार अपनी साफ-सफाई को ही दोष न दें। इसे महज एक साधारण इन्फेक्शन समझने की भूल न करें, क्योंकि यह आपके शरीर में हो रहे जैविक और हार्मोनल बदलावों का संकेत भी हो सकता है। सही समय पर इसकी सटीक जांच और सही मेडिकल सलाह आपके यूरिनरी, वैजाइनल और ओवरऑल रिप्रोडक्टिव हेल्थ को लंबे समय तक सेहतमंद बनाए रखने में बहुत बड़ी भूमिका निभा सकती है।
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