डेस्क। भारत के फाइटर बेड़े में ऐसे विमान शामिल हैं जिन्हें युद्ध के मैदान की अलग-अलग जरूरत के हिसाब से डिजाइन किया गया है। जहां सुखोई 30MKI में जबरदस्त फायर पावर और लंबी दूरी तक मार करने की क्षमता है वहीं तेजस तेजी से मुड़ने की क्षमता, स्वदेशी तकनीक और कम ऑपरेटिंग लागत पर फोकस करता है। दूसरी तरफ राफेल में एडवांस्ड सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक वाॅरफेयर और लंबी दूरी के हथियार एक साथ मिलते हैं। आइए जानते हैं इन तीनों में सबसे ज्यादा काबिल कौन है?
यह भी पढ़ें-‘खटाखट’ वाला पैसा लेने के लिए लखनऊ कांग्रेस ऑफिस पर उमड़ी महिलाएं
राफेल :
फ्रांस में बना राफेल 4.5 जेनरेशन का दो इंजन वाला मल्टी रोल फाइटर है। यह लगभग 2500 किलोग्राम तक का हथियार पे लोड ले जा सकता है और इस हवा से हवा, हवा से जमीन और दूसरे खास मिशन पूरे करने के लिए डिजाइन किया गया है। सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और हथियारों का इसका कॉम्बिनेशन इसे मुश्किल लड़ाई में बढ़त दिलाता है। राफेल की सबसे बड़ी ताकत में से एक है मीटियर बियॉन्ड विजुअल रेंज हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल।
सुखोई 30MKI:
सुखोई 30MKI राफेल और तेजस दोनों की तुलना में काफी बड़ा और भारी है। यह लगभग 8000 किलोग्राम का हथियार लोड ले जा सकता है और इसमें काफी ज्यादा फ्यूल क्षमता भी है। इससे इसकी रेंज और उड़ान की अवधि काफी अच्छी है। इसका बड़ा एयरफ्रेम इसे कई तरह के हथियार ले जाने की सुविधा देता है। भारतीय सुखोई बेड़े की एक बड़ी ताकत हवा से लॉन्च होने वाली ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को ले जाने और लॉन्च करने की क्षमता है। इससे विमान को जमीन और समुद्र में मौजूद अहम ठिकानों पर लंबी दूरी से जबरदस्त हमला करने की क्षमता मिलती है।

तेजस:
Tejas भारत का स्वदेशी हल्का लड़ाकू विमान है। यह एक सिंगल इंजन वाला फाइटर जेट है जिसे कम ऑपरेटिंग कॉस्ट में कई तरह के मिशन पूरा करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसका छोटा एयरफ्रेम और मॉडर्न एवियोनिक्स इसे भारत के घरेलू फाइटर जेट प्रोडक्शन को मजबूत करने की कोशिश का एक जरूरी हिस्सा बनाते हैं।
आसान शब्दों में कहें तो राफेल टेक्नोलॉजी का माहिर है, सुखोई सबसे भारी और ताकतवर है और तेजस फुर्तीला घरेलू फाइटर जेट है। इनकी असली ताकत हर एयरक्राफ्ट को मिशन के हिसाब से इस्तेमाल करने में है।
Tag: #nextindiatimes #Tejas #Sukhoi30MKI




