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शुक्रवार, जून 12, 2026

लैपटॉप-गाड़ी है या नहीं…जनगणना में ये सवाल क्यों? जानें वजह

डेस्क। भारत में Census 2027 की प्रक्रिया जोरों-शोरों से चल रही है। भारत की जनगणना अब देश में कितने लोग रहते हैं सिर्फ इसकी गिनती तक ही सीमित नहीं है। इस जानकारी में यह भी शामिल होता है कि परिवारों के पास लैपटॉप, कंप्यूटर, इंटरनेट कनेक्शन, मोबाइल फोन, गाड़ी, मोटरसाइकिल या फिर दूसरी संपत्ति है या नहीं लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर जनगणना के समय इस तरह के सवाल क्यों पूछे जाते हैं?

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गाड़ी, लैपटॉप, टेलीविजन और इंटरनेट एक्सेस जैसी संपत्तियों के बारे में पूछने का सबसे बड़ा कारण परिवार के वास्तविक जीवन स्तर को समझना है। अकेली इनकम हमेशा पूरी तस्वीर नहीं दिखाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि लोग अपनी कमाई की सही-सही जानकारी नहीं दे पाते हैं। घरेलू संपत्ति आर्थिक कल्याण का काफी ज्यादा विश्वसनीय संकेतक प्रदान करती है। इसी के साथ यह नीति निर्माताओं को समाज के समृद्ध और आर्थिक रूप से कमजोर दोनों वर्गों की पहचान करने में मदद करती है।

लैपटॉप, स्मार्टफोन और इंटरनेट कनेक्टिविटी की मौजूदगी देश की डिजिटल तैयारी में एक बड़ी भूमिका निभाती है। अगर कुछ जिले या फिर ग्रामीण क्षेत्र कम डिजिटल पहुंच दिखाते हैं तो सरकार कनेक्टिविटी, डिजिटल शिक्षा और प्रौद्योगिकी तक पहुंच में सुधार पर निवेश पर ध्यान केंद्रित कर सकती है। ऐसी जानकारी शहरी और ग्रामीण आबादी के बीच डिजिटल विभाजन को कम करने में बड़ी भूमिका निभाती है।

संयुक्त राष्ट्र और विश्व बैंक जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठन अक्सर किसी देश के विकास के स्तर का आकलन करने के लिए इंटरनेट की सुविधा, घरों की गुणवत्ता, गाड़ियों के मालिकाना हक और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे पैमाने का इस्तेमाल करते हैं। जनगणना के आंकड़ों से भारत को ग्लोबल मंच पर अपनी आर्थिक और सामाजिक प्रगति की साफ तस्वीर पेश करने और दूसरे देशों के मुकाबले अपने विकास का आकलन करने में मदद मिलती है।

Tag: #nextindiatimes #Census2027 #INDIA

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