इस्लामाबाद। पाकिस्तान की राजधानी Islamabad इन दिनों चर्चा के केंद्र में है। इसकी मुख्य वजह अमेरिका-ईरान की शांति वार्ता है। पाकिस्तान में पीएम से लेकर राष्ट्रपति, सब खुशी से झूम रहे हैं। उन्हें ऐसा लग रहा है कि पड़ोसी देश ईरान और दूर देश अमेरिका के बीच युद्ध विराम में मध्यस्थ की भूमिका की असली वजह वही हैं। आइए समझते हैं अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत का केंद्र इस्लामाबाद ही क्यों बना?
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साल 1959 में राष्ट्रपति अयूब खान के शासनकाल में पाकिस्तान ने नई राजधानी बनाने का फैसला लिया। इसके पीछे मुख्य उद्देश्य एक ऐसा शहर बसाना था जो सुरक्षित हो, आधुनिक हो और जहां से सेना मुख्यालय यानी रावलपिंडी भी पास हो। 1960 के दशक में यूनानी वास्तुकार कॉन्स्टेंटिनोस ए. डोक्सियाडिस ने इस्लामाबाद का मास्टर प्लान तैयार किया।
इस्लामाबाद पाकिस्तान के अन्य शहरों से बिल्कुल अलग है। यह एक नियोजित शहर है। इस्लामाबाद को मार्गाला की पहाड़ियों के नीचे बसाया गया। यह जगह प्राकृतिक रूप से बहुत सुरक्षित है। इसकी ऊंचाई और पहाड़ी इलाके इसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाते हैं। रावलपिंडी के पास होने के कारण नागरिक प्रशासन और सेना के बीच समन्वय बहुत आसान हो गया। पाकिस्तान का पावर सेंटर बनाने में यहां की भौगोलिक स्थिति का बड़ा योगदान रहा है।

इस शहर की अहमियत तब और बढ़ जाती है जब अंतर्राष्ट्रीय शांति की बात आती है। पाकिस्तान के ईरान के साथ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध हैं, वहीं अमेरिका के साथ उसके रणनीतिक और सैन्य संबंध रहे हैं। इस्लामाबाद में स्थित विदेशी दूतावास और डिप्लोमैटिक एन्क्लेव इसे अंतर्राष्ट्रीय राजनीति का अखाड़ा बनाते हैं। जब भी खाड़ी देशों या पश्चिमी देशों के बीच तनाव होता है, इस्लामाबाद अक्सर एक पुल का काम करने की कोशिश करता है।
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