हेल्थ डेस्क। पश्चिम अफ्रीका के पास एक क्रूज शिप पर संदिग्ध हंता वायरस (Hantavirus) संक्रमण के बाद दुनिया भर में इस बीमारी को लेकर चिंता बढ़ गई है। जहाज पर कई लोग बीमार पड़े हैं और कुछ की मौत भी हुई है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह वायरस कोरोना की तरह तेजी से फैलने वाला नहीं है, लेकिन गंभीर मामलों में जानलेवा साबित हो सकता है।
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इस वायरस का नाम दक्षिण कोरिया की हंतान नदी के नाम पर पड़ा है। सबसे पहले इस इलाके में 1978 में रहस्यमयी बुखार के मामलों के बाद वैज्ञानिकों ने वायरस की पहचान की थी। बाद में पता चला कि यह संक्रमण मुख्य रूप से चूहों और दूसरे कृन्तकों से इंसानों तक पहुंचता है।
हंता वायरस संक्रमित चूहों के पेशाब, लार और मल के जरिए फैलता है। कई बार सूखे मल या पेशाब के बेहद छोटे कण हवा में मिल जाते हैं और सांस के जरिए शरीर में पहुंच जाते हैं। यही संक्रमण का सबसे बड़ा कारण माना जाता है। पुराने बंद मकान, गोदाम, खेत, लकड़ी के ढेर और गंदे स्टोर रूम ज्यादा जोखिम वाले स्थान माने जाते हैं। हालांकि आमतौर पर हंता वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं जाता है। हंता के संक्रमण का पता लगने में एक से आठ हफ्तों का वक़्त लग सकता है।

अगर कोई व्यक्ति हंता संक्रमित है तो उसे बुखार, दर्द, सर्दी, बदन दर्द, उल्टी जैसी दिक़्क़तें हो सकती हैं। हंता संक्रमित व्यक्ति की हालत बिगड़ने पर फेफड़ों में पानी भरने और सांस लेने में तकलीफ़ भी हो सकती है। फिलहाल हंता वायरस की कोई तय वैक्सीन या विशेष दवा उपलब्ध नहीं है। डॉक्टर मरीज को लक्षणों के आधार पर इलाज देते हैं। समय पर अस्पताल पहुंचने और ऑक्सीजन सपोर्ट मिलने से जान बचने की संभावना बढ़ जाती है। हंता वायरस से बचने का सबसे अच्छा तरीका चूहों से दूरी बनाना है।
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