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सोमवार, जून 15, 2026

क्या है G7 समूह, जानें आखिर क्यों इसका हिस्सा नहीं बन पाए चीन और रूस

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मंच पर इस समय बेहद हलचल मची हुई है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के विशेष आमंत्रण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 16-17 जून को आयोजित हो रहे प्रतिष्ठित जी7 शिखर सम्मेलन (G7 Summit) में शिरकत करने के लिए फ्रांस पहुंच चुके हैं।

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इस बेहद महत्वपूर्ण वैश्विक बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी जी7 के सभी सदस्य देशों, आमंत्रित सहयोगी राष्ट्रों और दुनिया के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठनों के शीर्ष नेताओं के साथ कई गंभीर मुद्दों पर सीधी बात करेंगे। इस बड़े वैश्विक आयोजन के बीच हर किसी के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर यह संगठन क्या है और रूस व चीन इसमें क्यों शामिल नहीं हैं?

जी7 का पूरा नाम ‘ग्रुप ऑफ सेवन’ है, जो असल में दुनिया की सात सबसे ज्यादा विकसित और बड़ी औद्योगिक अर्थव्यवस्थाओं का एक बेहद प्रभावशाली अनौपचारिक संगठन है। इस खास समूह के भीतर अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और कनाडा जैसे बेहद ताकतवर देश शामिल हैं। इस महत्वपूर्ण संगठन की शुरुआत साल 1975 में हुई थी, जब पूरी दुनिया भयानक तेल संकट, बेकाबू महंगाई और गंभीर आर्थिक अस्थिरता के दौर से गुजर रही थी।

उस मुश्किल दौर में वैश्विक संकटों का हल निकालने के लिए फ्रांस ने एक बड़ी पहल की थी। फ्रांस के बुलावे पर ही अमेरिका, ब्रिटेन, पश्चिम जर्मनी, इटली और जापान के शीर्ष नेताओं ने मिलकर पहली बैठक की थी, जिसके बाद अगले ही साल यानी 1976 में कनाडा को भी इस समूह का हिस्सा बनाया गया और इस तरह जी7 का मौजूदा स्वरूप पूरी दुनिया के सामने आया।

जी7 में शामिल क्यों नहीं रूस?

इस प्रभावशाली समूह के इतिहास में एक ऐसा दिलचस्प समय भी आया था जब महाशक्ति रूस भी आधिकारिक रूप से इस खास क्लब का हिस्सा बन गया था। साल 1998 में रूस को इस विशिष्ट समूह में बहुत ही सम्मान के साथ शामिल किया गया था, जिसके बाद इस संगठन का नाम बदलकर जी7 से जी8 हो गया था। हालांकि रूस का इस ग्रुप के साथ यह सफर बहुत ज्यादा लंबा नहीं चल सका। साल 2014 में जब रूस ने अंतरराष्ट्रीय नियमों को ताक पर रखकर क्रीमिया पर अपना सैन्य कब्जा कर लिया तो अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और यूरोप के दूसरे तमाम पश्चिमी देश रूस के इस कदम के पूरी तरह खिलाफ खड़े हो गए।

चीन जी7 में शामिल क्यों नहीं?

जब 1970 के दशक में इस संगठन की स्थापना की गई थी, उस समय चीन की आर्थिक स्थिति आज जैसी मजबूत और विशाल बिल्कुल भी नहीं थी। बाद के सालों में चीन ने आर्थिक मोर्चे पर बहुत तेजी से प्रगति की और वह एक ग्लोबल महाशक्ति बनकर जरूर उभरा लेकिन वह आज भी लोकतंत्र की बुनियादी राह से कोसों दूर खड़ा है।

इसके अलावा चीन और जी 7 के सदस्य देशों के बीच मानवाधिकारों के हनन, दक्षिण चीन सागर में अवैध सैन्य विस्तार, ताइवान का पुराना विवाद, वैश्विक व्यापार के कड़े नियम और मौजूदा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था जैसे कई बेहद संवेदनशील विषयों पर बहुत गहरे मतभेद हैं। यही मुख्य कारण है कि चीन इस लोकतांत्रिक समूह का हिस्सा नहीं है, हालांकि इसकी बैठकों में चीन से जुड़े मुद्दों पर हमेशा ही चर्चा होती है।

Tag: #nextindiatimes #G7Summit #Russia #China

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