हेल्थ डेस्क। सबकी जिंदगी में एक समय ऐसा आता है जब उनके इमोशन पर anxiety भारी पड़ती है। इसकी वजह कुछ भी हो सकती है, किसी तरह का डर, कोई बीमारी, फाइनेंशियल दिक्कत, अकेलापन या ऐसा कुछ जो बचपन में झेला हो पर अभी तक उबर नहीं पाये। पर यहां हम एंग्जाइटी पर बात नहीं करेंगे, हम एंग्जाइटी के समय में खुद को संभाले कैसे इसपर बात करेंगे।
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यह सबसे जरूरी है कि आपको अपनी एंग्जाइटी की वजह पता हो। कई बार खुद से बात करके तो कभी दूसरों से जानकारी लेकर इसका पता लगाया जा सकता है। एक बार प्रॉब्लम मिल जाए, उसके बाद उसका सोल्यूशन ढूंढने में कोई दिक्कत नहीं होगी।
-रोजमर्रा के कामों में नया रूटीन बनाएं, ऐसा कुछ जो दिमाग को व्यस्त रखे ताकि एंग्जाइटी ट्रिगर न होने पाए।
-एंग्जाइटी एक मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्या है, जो व्यक्ति को दूसरों से अकेला कर सकती है। इससे बचने के लिए लोगों से जुड़े रहना बेहद जरूरी है ताकि अपने मन की बात कही जा सके। वैसे भी लोगों से घुलने-मिलने से तनाव कम होता है।

-अगर आप उनमें से हैं जो हर समय काम में व्यस्त रहते हैं या अपने आप से पहले दूसरों के बारे में सोचते हैं तो रुक जाइए। अपने लिए समय निकालिए और सेल्फ केयर के बारे इन सोचिये। पसंदीदा गाना, फेवरेट फूड या स्किनकेयर जैसी बहुत चीजें आपको अंदर से तरोताजा कर सकती हैं।
-जैसे ही एंग्जाइटी अटैक आये, आंखे बंद करके फेफड़ों तक जितनी सांस खींच सकते हैं खींचें। फिर सांस को थोड़े समय के लिए रोककर उसे धीरे-धीरे छोड़ें। साथ ही, यह भी कहते चलें कि सब कुछ ठीक है। इससे नर्वस सिस्टम को आराम देने में मदद मिलती है।
-रोजाना मेडिटेशन से एंग्जाइटी, तनाव या मेंटल प्रेशर जैसी चीजों का समाधान धीरे-धीरे होने लगता है। यह तरीके हमें खुद से जोड़ने और जानने में भी बड़ा फायदेमंद है।
-एक्सरसाइज करने से बॉडी से एंडोर्फिन नामक हार्मोन रिलीज होता है, जो एक हैप्पी हार्मोन है। इससे अंदर खुशी और सुकून वाली भावना बढ़ती है। अपने रूटीन में वॉकिंग, रनिंग, डांसिंग, पुशअप्स और जंपिंग जैक्स जैसी एक्सरसाइज शामिल करें।
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