लखनऊ। उत्तर प्रदेश अब सिर्फ अपनी संस्कृति के लिए ही नहीं, बल्कि विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भी जाना जा रहा है। इसी कड़ी में Ganga Expressway एक ऐसा मेगा प्रोजेक्ट बनकर सामने आया है, जो न केवल उत्तर प्रदेश के भौगोलिक स्वरूप को बदल देगा, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्रदान करेगा।
यह भी पढ़ें-आखिर यूपी का नाम उत्तर प्रदेश ही क्यों रखा गया, जुड़ा है एक दिलचस्प संयोग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लोकार्पण की तैयारी के साथ यह 594 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर नए यूपी की प्रगति का प्रतीक बनने जा रहा है। मेरठ से प्रयागराज तक की इस यात्रा में अब घंटों का सफर मिनटों में सिमटता नजर आएगा। तकरीबन 36,402 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार किया गया यह गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश का अब तक का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे है।
यह एक्सप्रेसवे मेरठ के बिजौली गांव से शुरू होकर प्रयागराज के जुडापुर दांदू गांव तक जाता है, जो राज्य के 12 प्रमुख जिलों को एक सूत्र में पिरोता है। गंगा एक्सप्रेसवे सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि विकास की एक ऐसी धुरी है जो मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज को लाभान्वित करेगी।

इस परियोजना के दायरे में 519 गांव आते हैं, जो सीधे तौर पर इस आधुनिक कॉरिडोर से जुड़ेंगे। इससे गांव और शहर के बीच की दूरी न केवल किलोमीटर में कम होगी, बल्कि स्थानीय बाजारों और रोजगार के अवसरों तक पहुंच भी आसान हो जाएगी। यह पश्चिमी और पूर्वी यूपी के व्यापारिक केंद्रों के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करेगा। उन्नाव के पास गंगा एक्सप्रेसवे को आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए एक विशाल और अत्याधुनिक इंटरचेंज बनाया गया है। यह व्यवस्था उन यात्रियों के लिए वरदान है जो आगरा, कानपुर या लखनऊ की यात्रा करना चाहते हैं।
Tag: #nextindiatimes #GangaExpressway #UttarPradesh




