डेस्क। भारत के कई राज्यों में गर्मी अपने प्रचंड रूप में आ चुकी है। इस साल समय से पहले ही लू का प्रकोप दिखाई दे रहा है। पंजाब, दिल्ली से लेकर ओडिशा और बिहार तक तापमान रिकॉर्ड तोड़ रहा है। अल नीनो का नाम तो आपने सुना होगा, लेकिन अब सुपर अल नीनो भी काफी चर्चा में है।
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अल नीनो एक नेचुरल क्लाइमेट पैटर्न है जो प्रशांत महासागर में हर 2 से 7 साल के अंतराल पर होता है। आमतौर पर ट्रेड विंड्स गर्म पानी को एशिया की ओर धकेलती हैं, लेकिन अल नीनो के दौरान, ये हवा कमजोर पड़ जाती हैं और मध्य व पूर्वी प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से ज्यादा बढ़ जाता है।
Super El Nino इस घटना का एक बेहद शक्तिशाली रूप है।अल नीनो में प्रशांत महासागर का सतही तापमान 0.5°C से 1.4°C से ज्यादा गर्म हो जाता है। जब समुद्र की सतह का तापमान औसत से +2.0°C या उससे ज्यादा बढ़ जाता है, तो इसे सुपर अल नीनो कहा जाता है। यह मानसून हवा और बारिश के साइकिल को पूरी तरह बाधित कर देता है, जिसका असर प्रशांत महासागर से हजारों मील दूर स्थित भारत पर भी पड़ता है।

IMD ने पहले ही चेतावनी दी है कि अप्रैल से जून के बीच उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत में सामान्य से ज्यादा हीटवेव डेज होंगे। सुपर अल नीनो इन गर्म हवाओं की तीव्रता और समय को बढ़ा सकता है, जिससे तापमान 45°C-48°C के पार जा सकता है। अल नीनो के का सीधा संबंध कमजोर मानसून से है।सुपर अल नीनो के कारण मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ सकती हैं, जिससे देश के कई हिस्सों में बारिश में भारी कमी आ सकती है।
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