लाइफस्टाइल डेस्क। बीते कुछ सालों में मौसम तेजी से बदल रहा है, इसका सबसे बड़ा कारण है जलवायु परिवर्तन। बढ़ती गर्मी इसी का परिणाम है। तभी तो लोग हीट वेव (heatwave) को लेकर ज्यादा सचेत हो गए हैं, लेकिन एक नई स्टडी ने चिंता और बढ़ा दी है। हाल ही में, एक स्टडी में यह खुलासा हुआ है कि बदलता-बिगड़ता यह मौसम जहां एक तरफ हम सभी की सेहत को नुकसान पहुंचा रहा है तो वहीं इस गर्मी और उमस से गर्भ में पल रहे बच्चे पर भी बुरा असर पड़ सकता है।
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साइंस एडवांस की स्टडी में यह दावा किया गया है कि बढ़ता तापमान ही नहीं बल्कि उमस वाली गर्मी भी गर्भ में पल रहे भ्रूण की सेहत बिगाड़ सकती है। यह रिसर्च दक्षिण एशिया के करीब 2 लाख बच्चों को आधार बनाकर की गई है। ध्यान देने वाली बात यह थी कि इनमें ज्यादातर बच्चे भारत के थे।
रिसर्च में प्रेग्नेंसी के समय हीट और ह्यूमिड से बच्चे पर पड़ने वाले प्रभाव पर फोकस किया गया है। रिसर्च में पाया गया कि बढ़ते तापमान और उमस का बच्चों में स्टंटिंग से सीधा कनेक्शन है। इस स्टडी में गर्मी और उमस वाली गर्मी के बीच के फर्क को भी समझाया गया ताकि उसके दुष्प्रभावों को ठीक से समझा जा सके। इसके मुताबिक सूखी गर्मी से ज्यादा उमस वाली गर्मी खतरनाक है।

यह स्टडी दावा करती है कि अगर तापमान इसी तरह से बढ़ता रहा तो इससे गर्भवती महिलाओं पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। एक प्रभाव तो यह कि इससे मां से भ्रूण को मिलने वाले ऑक्सीजन और पोषण में कमी आएगी। इतना ही नहीं, स्टडी दावा यह भी कर रही है कि तापमान के इसी तरह से बढ़ने से दक्षिण एशिया के 3 से 3.7 मिलियन बच्चे साल 2050 तक स्टंटिंग का शिकार हो सकते हैं। सबसे चिंताजनक बात इसमें ज्यादातर भारत के बच्चों का शामिल होना है क्योंकि इसमें गर्भवती महिलाओं और उनके होने वाले बच्चे पर गंभीर असर पड़ने की बात कही गई है। इस तरह यह भारत के लिए किसी खतरे की घंटी से कम नहीं।
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