सिद्धार्थनगर। जिले के मिश्रौलिया थाना क्षेत्र से एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक नाबालिग लड़की ने अपने फूफा पर करीब एक वर्ष तक बंधक बनाकर दुष्कर्म (rape) करने का आरोप लगाया है। पीड़िता का कहना है कि आरोपी उसे घर के काम के बहाने अपने गांव केवटली ले गया कुछ दिन बाद बंधक बनाकर उसे लखनऊ ले गया जंहा पर उसके साथ कई महीनों तक अपने कब्जे में रखकर उसका शोषण करता रहा।
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मीडिया से बात चीत में पीड़िता के अनुसार आरोपी फूफा ने उसके साथ लगातार दुष्कर्म किया और दो बार गर्भ ठहरने पर उसे लखनऊ के एक निजी अस्पताल ले जाकर गर्भपात भी कराया। पीड़िता के बड़े पिता ने बताया कि मैं अपने रोजी रोटी को लेकर मुंबई रहता हूँ। मुझे जानकारी मिली कि मेरी भतीजी को मेरे सगे बहनोई मक्की हसन केवटली थाना इटवा के निवासी हैं मेरे घर पर आए थे और मेरे भाई से कह रहे थे कि मेरी बेटी की तबियत खराब है। अपने बेटी को 15 दिन के लिए खाना बनाने के लिए भेज दो वो मेरी भतीजी को खाना बनाने के लिए केवटली लेकर गए जिसके बाद वो उसे घर का कहकर बंधक बनाकर उसे लखनऊ लेकर चले गए जहां पर उसे 1 साल तक साथी बंधक बनाकर उसके साथ दुष्कर्म करते रहे।

दो बार गर्भ ठहरने के बाद उसका लखनऊ स्थित एक निजी अस्पताल में गर्भपात भी कराया। जब मेरी भतीजी इसका विरोध करती तो वह उसके ऊपर बंदूक तान देते और उसके शरीर पर चाकू से वार करते जिससे उसके शरीर पर चाकू के घावों के कई निशान अभी भी मौजूद हैं। मेरा भाई और मेरा बेटा लगातार उनसे फोन पर बात करता था और कहता था कि मेरी बेटी को भेज दो लेकिन वह लोग नहीं भेज रहे थे। ईद के दिन सूचना मिली कि मेरी भतीजी के केवटली आई हुई है।
इसके बाद मेरे बेटे ने जाकर उसको अपने घर वापस लाया और उसने मुझे फोन पर बात कर कहा कि अब्बू आप चले आओ। तबीयत खराब होने के कारण मैं कुछ दिन देरी से घर पहुंचा तो मेरी बेटी ने पूरी कहानी बताई। उसके शरीर पर चोट के कई निशान आज भी मौजूद है साथी उसके कान पर भी चोट के निशान मौजूद हैं।
मामले में सबसे गंभीर आरोप पुलिस की कार्यशैली को लेकर लगाए गए हैं। पीड़ित पक्ष का कहना है कि जब उन्होंने मिश्रौलिया थाने में शिकायत की तो तत्कालीन थाना प्रभारी ने मनोज कुमार श्रीवास्तव ने एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया था। परिजनों का आरोप है कि पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन के हस्तक्षेप के बाद ही मुकदमा दर्ज हो सका और आरोपी को जेल भेजा गया।
हालांकि अब पीड़ित परिवार का दावा है कि उन पर समझौते का दबाव बनाया जा रहा है। पीड़ित पक्ष ने जांच अधिकारी पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि जांच के दौरान पॉक्सो एक्ट की धाराओं को कमजोर करने की बात कही गई। साथ ही पीड़ित ने बताया कि CO इटवा परवीन प्रकाश व थाना प्रभारी मिश्रौलिया मनोज कुमार श्रीवास्तव ने निजी लाभ लेकर के 89 BNS की धारा को निकलवा दिया है। मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज है और पीड़ित परिवार निष्पक्ष जांच तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहा है। साथ ही पीड़ित परिवार ने मामले की जांच अन्य जनपद के किसी महिला दरोगा से कराने की मांग की है।
(रिपोर्ट- दीप यादव, सिद्धार्थनगर)
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