नई दिल्ली। राजनीतिक हलचल और विरोध के बीच देश के केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है और उनको अपना पद छोड़ना पड़ा है। लंबे वक्त से चल रहे जेन-जी के प्रदर्शनों के दबाव के बीच उनका यह इस्तीफा देश भर में चर्चा का विषय है। चलिए जानें कि क्या इस्तीफे के बाद से धर्मेंद्र प्रधान को अपना सरकारी बंगला भी खाली करना होगा?
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कैबिनेट मंत्री के रूप में उनको लुटियंस दिल्ली में आलीशान टाइप-8 श्रेणी का बंगला मिला हुआ था, जिसको अब नियमपूर्वक खाली करना होगा। हालांकि वे ओडिशा के संबलपुर के लोकसभा सदस्य हैं, इसलिए वे पूरी तरह से सरकारी आवास से बेघर नहीं होंगे। उन्हें कैबिनेट मंत्री के आवास के बजाय एक आम सांसद की पात्रता के अनुसार दूसरा छोटा सरकारी मकान आवंटित किया जाएगा।
कैबिनेट पद से हटने के साथ ही धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) को मिलने वाला 1 लाख रुपये प्रतिमाह का मूल वेतन और अन्य विशेष आधिकारिक भत्ते तुरंत प्रभाव से बंद हो गए हैं। इसके अलावा कैबिनेट बैठकों में शामिल होने का अधिकार और नीतिगत फैसले लेने की शक्तियां भी खत्म हो चुकी हैं। हालांकि सांसद के रूप में मिलने वाली निर्धारित सैलरी, भत्ते और सुविधाएं पहले की तरह से मौजूद रहेंगी।

अब बात करते हैं पेंशन की ; किसी भी मंत्री को सिर्फ इस वजह से पेंशन नहीं मिलती क्योंकि उन्होंने मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया है। अगर व्यक्ति संसद सदस्य के रूप में काम करना जारी रखता है तो वह पेंशन के बजाय सांसदों को मिलने वाले वेतन और भत्ते का हकदार बना रहता है। संसदीय नियमों के मुताबिक कोई भी व्यक्ति एक साथ संसद का वेतन और पूर्व सांसद की पेंशन नहीं प्राप्त कर सकता।
हालांकि मंत्री पद खत्म हो जाता है, निर्वाचित संसद के रूप में व्यक्ति की स्थिति तब तक बिना किसी बदलाव की रहती है जब तक कि वह संसद से इस्तीफा नहीं दे देता या फिर उसका कार्यकाल समाप्त नहीं हो जाता। व्यक्ति को संसद सदस्यों को मिलने वाला वेतन, निर्वाचन क्षेत्र भत्ता और दूसरे फायदे मिलते रहते हैं।
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