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मंगलवार, जुलाई 7, 2026

जंक फूड की आदत युवाओं में बढ़ा रही माइग्रेन का खतरा, जानें सही इलाज

लाइफस्टाइल डेस्क। आजकल की भागती-दौड़ती जिंदगी में युवाओं में माइग्रेन (migraine) के केस भी बढ़ते जा रहे हैं, जो कहीं न कहीं चिंता का विषय है। ऐसे में हमें यह जानना जरूरी है कि आखिर माइग्रेन के कारण क्या हैं, यह सिर दर्द से कितना अलग है और इससे बचाव के लिए क्या तरीके अपनाए जा सकते हैं?

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बच्चे और टीनेजर शारीरिक और मानसिक रूप से संवेदनशील होते हैं। रोजमर्रा की जीवनशैली के बहुत से कारक माइग्रेन के लिए जिम्मेदार हैं। इनमें बहुत सी बुरी आदतें शामिल हैं:

अनियमित नींद पैटर्न जैसे- बहुत कम या बहुत ज्यादा सोना,

ठीक से न खाना या खराब पोषण

डिहाइड्रेशन

स्क्रीन टाइम ज्यादा होना

स्ट्रेस, एंग्जायटी

फिजिकल एक्टिविटी का कम होना

कैफीन या एनर्जी ड्रिंक का ज्यादा सेवन

कैफीन को एकदम से छोड़ देना

पैकेट या शुगर फूड्स का ज्यादा सेवन

स्मोकिंग

माइग्रेन में ज्यादातर सिर के एक हिस्से में दर्द होता है, इसे धड़कन वाला सिर दर्द भी कहते हैं। यह सिर दर्द करीब 4-72 घंटों तक रहता है। इसके साथ और कई लक्षण दिखते हैं, जैसे- मतली, उल्टी, रोशनी और आवाज से परेशानी, सिर हिलाने पर संवेदनशीलता महसूस होना।

माइग्रेन से बचने के जीवनशैली की बुरी आदतों में सुधार करने के साथ ही कई और तरीके अपनाए जा सकते हैं। इनमें बायोफीडबैक थेरेपी, कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी, एक्यूपंक्चर और नॉन-इनवेसिव न्यूरोमॉड्यूलेशन जैसे बिना दवा के विकल्प शामिल हैं। माइग्रेन का दर्द अगर बार-बार होता है तो उसके लिए डॉक्टर की सलाह पर दवा लेना भी जरूरी है।

माइग्रेन को पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता, लेकिन इसे जीवनशैली में सुधार करके मैनेज जरूर किया जा सकता है। अच्छी आदतों और बेहतर ट्रीटमेंट से इसके लक्षणों को बहुत हद तक कम किया जा सकता है। कई बच्चों और टीनेजर जैसे-जैसे बड़े होते हैं, उनमें माइग्रेन की समस्या कम होती जाती है, जबकि कई के साथ यह समस्या उम्र बढ़ने तक बनी रहती है।

Tag: #nextindiatimes #migraine #Lifestyle

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