नई दिल्ली। भारत की वीजा (Visa) और इमीग्रेशन व्यवस्था दुनिया की सबसे सख्त व्यवस्थाओं में से एक है। इसमें सुरक्षा को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जाती है। अभी सिर्फ दो देशों के नागरिकों को ही भारत में पूरी तरह से वीजा फ्री एंट्री मिलती है। साथ ही तीन दूसरे देशों के नागरिकों को कुछ खास शर्तों के तहत विजा ऑन अराइवल सुविधा का फायदा मिलता है।
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भारत नेपाल और भूटान के उन नागरिकों को पूरी तरह से वीजा फ्री एंट्री देता है जिनके पास सामान्य पासपोर्ट हैं। इन पड़ोसी देशों के नागरिक पासपोर्ट या फिर नागरिकता प्रमाण पत्र जैसे वैध पहचान दस्तावेज दिखाकर भारत में आ सकते हैं। उन्हें बिना वीजा के भारत में रहने और काम करने की भी अनुमति है।
भारत अभी जापान, दक्षिण कोरिया और संयुक्त अरब अमीरात के नागरिकों को विजा ऑन अराइवल सुविधा देता है। हालांकि संयुक्त अरब अमीरात के नागरिक इस सुविधा के लिए तभी पात्र होते हैं जब उन्होंने पहले भारतीय ई वीजा या फिर पेपर वीजा लिया हो। दूसरे देशों के नागरिकों को यात्रा करने से पहले या तो ऑनलाइन ई वीजा के लिए आवेदन करना होगा या फिर भारतीय दूतावास से रेगुलर वीजा लेना होगा।

भारत विदेशी यात्रियों खासकर सुरक्षा के नजरिए से संवेदनशील माने जाने वाले देशों के आवेदकों के लिए सबसे सख्त बैकग्राउंड वेरीफिकेशन प्रक्रिया अपनाता है। पाकिस्तान, बांग्लादेश या फिर चीनी मूल के नागरिकों के आवेदनों की काफी ज्यादा जांच की जाती है और वीजा देने से पहले गृह मंत्रालय से सुरक्षा मंजूरी लेनी पड़ती है।
इसी के साथ सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भारत लगभग सभी विदेशी नागरिकों के लिए आगमन पर बायोमैट्रिक ऑथेंटिकेशन अनिवार्य करता है। पहचान की पुष्टि करने और नकली दस्तावेज या फिर झूठी पहचान का इस्तेमाल करके प्रवेश रोकने के लिए फिंगरप्रिंट और आइरिस स्कैन लिए जाते हैं।
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