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मंगलवार, जुलाई 7, 2026

जेंडर टेस्ट करने वालों को कितनी मिलती है सजा, देखें क्या कहता है कानून

डेस्क। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में चलती कार के अंदर अवैध तरीके से लिंग जांच करने वाले एक शातिर गिरोह का पर्दाफाश हुआ है, जहां पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने मिलकर चार आरोपियों को दबोच लिया है। इस चौंकाने वाले मामले में एक बार फिर से कोख में पलने वाले बच्चे का जेंडर टेस्ट करान के काले कारोबार का मामला सामने आया है। भारत में ऐसा करना या करवाना एक बेहद गंभीर और गैर-जमानती अपराध है।

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इस कानूनी दायरे में सिर्फ जांच करने वाले डॉक्टर या लैब, बल्कि टेस्ट की मांग करने वाले परिजन भी सलाखों के पीछे जाते हैं। चलिए जानें कि इस मामले में किसको कितनी सजा मिलती है।

भारत में बेटियों को बचाने और लिंगानुपात को सुधारने के लिए साल 1994 में पीसीपीएनडीटी (Pre-Conception and Pre-Natal Diagnostic Techniques) अधिनियम लागू किया गया था। इस कड़े कानून (law) के तहत गर्भ में पल रहे शिशु का लिंग पता करना या फिर किसी भी माध्यम से उसे उजागर करना पूरी तरह से प्रतिबंधित है। इस कानून की नजर में कोख का सौदा करने वाले और इसमें शामिल बिचौलिए समाज के सबसे बड़े गुनाहगार माने जाते हैं।

लिंग जांच के इस गैर-कानूनी खेल में शामिल डॉक्टरों, टेक्नीशियन या लैब संचालकों के लिए कानून में बेहद सख्त कार्रवाई तय की गई है। अगर कोई डॉक्टर या फिर लैब संचालक पहली बार इस अपराध में पकड़ा जाता है तो उसे तीन साल तक की जेल और 50 हजार रुपये तक के भारी जुर्माने की सजा दी जाती है। इसके साथ ही आरोपी डॉक्टर का मेडिकल लाइसेंस तुरंत निलंबित कर दिया जाता है और दोष साबित होने पर पांच साल के लिए उनका नाम मेडिकल काउंसिल रजिस्टर से हटा दिया जाता है।

दोबारा अपराध करने पर:

अगर इतनी कार्रवाई के बाद भी कोई लैब संचालक या फिर डॉक्टर अपनी हरकतों से बाज नहीं आता है और दूसरी बार या फिर बार-बार लिंग परीक्षण करते हुए पकड़ा जाता है तो उसके प्रति कोई कानूनी नरमी नहीं बरती जाती है। ऐसे मामलों में जेल की सजा बढ़कर 5 साल तक हो जाती है और जुर्माने की रकम बढ़कर 1 लाख रुपये कर दी जाती है। सबसे बड़ी मार उनके करियर पर पड़ती है, क्योंकि दोबारा दोषी पाए जाने पर उस डॉक्टर या फिर संचालक का मेडिकल रजिस्ट्रेशन हमेशा-हमेशा के लिए रद्द कर दिया जाता है, जिससे वे दोबारा प्रैक्टिस नहीं कर पाते हैं।

परिजनों को कितनी मिलती है सजा?

भारत के कई सारे पिछड़े इलाकों में आज भी ऐसा देखा जाता है कि परिवार के लोग या पति बहू-बेटियों पर लड़का या लड़की जानने का दबाव बनाते हैं, लेकिन कानूनन ऐसे परिजन भी बराबर के दोषी हैं। कोख में लिंग की जांच कराने की जिद करने वाले या डॉक्टर पर इसके लिए दबाव बनाने वाले पति और रिश्तेदारों को पहली बार में ही तीन साल की कैद भुगतनी पड़ सकती है और साथ ही इनके लिए भी 50 हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। ये धारणा बिल्कुल गलत है कि इस मामले में सिर्फ डॉक्टर ही फंसेगा, कानूनन परिजन भी उतने ही दोषी हैं।

Tag: #nextindiatimes #Ghaziabad #law

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