लाइफस्टाइल डेस्क। आजकल हमारी रसोई में एक बड़ा और अच्छा बदलाव देखने को मिल रहा है। लोग मॉडर्न बर्तनों की जगह वापस अपने पुराने और पारंपरिक बर्तनों की तरफ लौट रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा चलन ‘लोहे की कड़ाही’ का बढ़ रहा है। दादी-नानी के जमाने से माना जाता रहा है कि लोहे की कड़ाही में बना खाना न सिर्फ स्वाद में लाजवाब होता है बल्कि हमारी सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है।
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जब हम लोहे की कड़ाही (iron) में खाना पकाते हैं तो बर्तन से प्राकृतिक रूप से थोड़ी मात्रा में आयरन निकलकर हमारे भोजन में घुल जाता है। यह प्रक्रिया शरीर में आयरन की कमी को पूरा करने में काफी मदद कर सकती है। खासतौर पर उन लोगों के लिए यह बहुत फायदेमंद है, जिन्हें आयरन की कमी या एनीमिया का खतरा बना रहता है।
एक दिलचस्प बात यह भी है कि जब आप इस कड़ाही में टमाटर, इमली या कोई अन्य खट्टी चीजें डालकर खाना पकाते हैं, तो भोजन में आयरन की मात्रा थोड़ी और बढ़ जाती है। लोहे की कड़ाही की एक बड़ी खासियत यह है कि यह हीट को बहुत लंबे समय तक अपने अंदर बनाए रखती है। इस वजह से इसमें खाना बहुत अच्छी तरह और समान रूप से पकता है। यही कारण है कि लोहे के बर्तन में बनी सब्जियां, पराठे और अन्य पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद दोगुना हो जाता है।

इतना ही नहीं अगर मजबूती की बात करें तो लोहे की कड़ाही आजकल के नॉन-स्टिक बर्तनों की तुलना में कहीं ज्यादा मजबूत और सालों-साल टिकने वाली होती है। जिन लोगों के शरीर में पहले से ही आयरन की मात्रा जरूरत से ज्यादा है, या जो आयरन से जुड़ी किसी खास बीमारी या स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं, उन्हें लोहे के बर्तनों का उपयोग करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए।
लोहे की कड़ाही का अगर सही तरीके से रखरखाव न किया जाए तो यह खराब भी हो सकती है। इसलिए इसके इस्तेमाल में कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए:
-इस्तेमाल करने और धोने के बाद कड़ाही को अच्छी तरह से सुखाना बहुत जरूरी है। अगर इसमें पानी या नमी रह गई, तो इसमें जंग लग सकती है।
-कड़ाही की क्वालिटी को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए, समय-समय पर इसके अंदरूनी हिस्से में हल्का-सा तेल लगाकर इसे ‘ग्रीस’ करते रहना चाहिए।
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