अयोध्या। अयोध्या के भव्य राम मंदिर (Ram Mandir) में भगवान को चढ़ाया जाने वाला चढ़ावा और पैसा गायब होने का मामला पिछले काफी दिनों से सुर्खियों में बना हुआ है। कई दिनों से इस मामले में जांच चल रही थी। मंदिर में वित्तीय हेराफेरी के इस गंभीर मामले का खुलासा होने के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और कई धाराओं में एफआईआर हुई है। यूपी सरकार के आदेश पर छह लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज हुई है।
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धारा 306:
इस मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 306 लगाई है। यह धारा तब लागू की जाती है, जब किसी संस्थान का कोई क्लर्क, नौकर या भरोसेमंद कर्मचारी ही अपने मालिक या नियोक्ता की संपत्ति की चोरी कर लेता है। राम मंदिर के चढ़ावे की देखरेख में कई लोगों पर लगा यह आरोप बेहद गंभीर माना जा रहा है। कानून के अनुसार इस अपराध में दोषी पाए जाने वाले को पूरे सात साल की सजा होती है, साथ ही जुर्माना भी भरना पड़ता है।
धारा 316(5):
मामला की गंभीरता को देखते हुए एफआईआर में धारा 316(5) को भी जोड़ा गया है। यह धारा मुख्य रूप से धोखेबाजी से जुड़ी हुई है। अगर कोई बैंकर, सरकारी कर्मचारी, व्यापारी या अधिकृत एजेंट अपने पद का फायदा उठाता है और जनता या किसी संस्था का भरोसा तोड़ता है और पैसों का गबन करने लगता है, तब यह धारा लगाई जाती है। इसके तहत अगर जुर्म साबित हो जाता है तो 10 साल की सजा या फिर आजीवन कारावास और जुर्माने का भी प्रावधान है।
धारा 317(4) और 317(5):
धारा 317(4) तब लगती है, जब कोई इंसान आदत से मजबूर होकर चोरी की संपत्ति खरीदता, बेचता या फिर उसका लेन-देन करता है, तो उसे 10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। वहीं धारा 317(5) की बात करें तो यह उन लोगों पर लगती है, जो कि जानबूझकर चोरी के पैसे या सामान को छिपाने या फिर उसे कहीं पर ठिकाने लगाने में मदद करते हैं। इस अपराध में दोषी को तीन साल की जेल या जुर्माना होता है।
धारा 61 और धारा 3(5):
धारा 61 आपराधिक षडयंत्र रचने के खिलाफ है, जिसमें दो या दो से ज्यादा लोग मिलकर किसी गलत काम को अंजाम देने की प्लानिंग करते हैं। वहीं धारा 3(5) भी समान इरादे को दर्शाती है, इसका मतलब है कि अगर कई लोगों ने मिलकर एक ही नीयत से अपराध किया है तो हर व्यक्ति को बराबर का दोषी माना जाता है और मेन अपराध के आधार पर ही कड़ी सजा दी जाती है।
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