लाइफस्टाइल डेस्क। क्या मैं भविष्य में मां बन पाऊंगी? मेरे करियर का क्या होगा? क्या यह बीमारी दोबारा लौट आएगी?” 30 या 35 की उम्र, जब किसी महिला में ‘अर्ली ब्रेस्ट कैंसर’ का निदान सामने आता है, तो मन में ऐसे ही सवाल उठते हैं। कम उम्र की महिलाओं के लिए यह सिर्फ एक बीमारी नहीं, बल्कि जिंदगी के हर पहलू को झकझोर देने वाला मोड़ होता है।
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हालांकि, राहत की बात यह है कि सही सलाह और आधुनिक उपचार के जरिए आज महिलाएं सिर्फ कैंसर से लड़ने के बजाय अपने भविष्य और एक खुशहाल जीवन को प्राथमिकता दे पा रही हैं।
अपोलो कैंसर सेंटर (दिल्ली-एनसीआर) में मेडिकल ऑन्कोलॉजी के लीड कंसल्टेंट डॉ. भुवन चुघ कहते हैं, “युवा महिलाओं में अर्ली ब्रेस्ट कैंसर का इलाज (Chemotherapy) सिर्फ दवाइयों तक सीमित नहीं रह सकता। इलाज का उद्देश्य बीमारी के लौटने के रिस्क को कम करने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना भी है कि मरीज की फर्टिलिटी सुरक्षित रहे और वे अपनी सामान्य जिंदगी में लौट सकें।”

कैंसर के वापस आने का डर स्वाभाविक है, लेकिन अपने ऑन्कोलॉजिस्ट से खुलकर बात करने से इस पर काबू पाया जा सकता है। अपनी रियल कंडीशन और आधुनिक बचाव के तरीकों को समझने से मन में एक सुरक्षा और नियंत्रण का भाव आता है। कीमोथेरेपी या अन्य दवाओं का असर मां बनने की क्षमता पर पड़ सकता है। इसलिए ट्रीटमेंट शुरू होने से पहले ही एग या एम्ब्रियो फ्रीजिंग जैसे विकल्पों पर डॉक्टरों से चर्चा कर लेनी चाहिए।
थकान या बालों का झड़ना जैसे बदलाव परेशान कर सकते हैं, लेकिन आज की ‘सपोर्टिव केयर’ दवाएं इन तकलीफों को काफी हद तक कम कर देती हैं। इस दौरान अपनों का साथ और थोड़ा बहुत एक्टिव रहना मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखता है। कैंसर को अपनी पूरी जिंदगी पर हावी न होने दें। वर्कप्लेस पर थोड़े बदलाव करके या अपनी पसंदीदा आदतों से जुड़े रहकर आप इस मुश्किल दौर में भी खुद को ऊर्जावान महसूस कर सकती हैं।
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