अभिजीत दिपके पर FIR, जानें कौन सी लगीं धाराएं और कितनी हो सकती है सजा?

डेस्क। महाराष्ट्र के लातूर जिले में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके मुसीबत में घिर गए हैं। उन पर औसा के एक सरकारी स्कूल में बिना अनुमति घुसने, सरकारी काम में बाधा डालने और शिक्षकों को धमकाने का आरोप लगा है। यह मामला जिला परिषद उर्दू स्कूल की 53 वर्षीय शिक्षिका सैयद शमशादबानो खैरात अली की शिकायत पर औसा पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया है।

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पुल‍िस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की कई गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस ने अभिजीत दिपके के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की चार धाराओं में मामला दर्ज किया है।

धारा 132 – यह धारा किसी लोक सेवक यानी सरकारी कर्मचारी को उसके कर्तव्य निर्वहन से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल के इस्तेमाल से जुड़ी है। इसका मतलब है कि आरोपी पर शिक्षकों को उनका काम करने से रोकने का आरोप है।
धारा 329(3) – यह धारा आपराधिक अतिचार यानी बिना अनुमति किसी की संपत्ति या परिसर में घुसने से संबंधित है। स्कूल में बिना इजाजत प्रवेश करने के आरोप में यह धारा लगाई गई है।
धारा 351(2) – यह धारा आपराधिक धमकी से जुड़ी है। शिकायत के मुताबिक, शिक्षकों को धमकाने के आरोप में यह धारा शामिल की गई है।
धारा 356(2) – यह धारा आपराधिक मानहानि से संबंधित है, यानी किसी व्यक्ति की सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाने के आरोप में यह धारा लगती है।

यदि अदालत में अभिजीत दिपके (Abhijit Dipke) के खिलाफ ये सभी आरोप पूरी तरह साबित हो जाते हैं, तो उन्हें अलग-अलग धाराओं के तहत जुर्माना और जेल दोनों का सामना करना पड़ सकता है। धारा 132 के तहत दोषी पाए जाने पर अधिकतम 2 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है। वहीं धारा 329(3) के तहत आपराधिक अतिचार साबित होने पर 3 महीने तक की जेल या 5,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

इसके अलावा धारा 356(2) के तहत मानहानि साबित होने पर 2 साल तक की साधारण जेल, जुर्माना या दोनों के अलावा सामुदायिक सेवा की सजा भी दी जा सकती है। साथ ही धारा 351(2) के तहत आपराधिक धमकी देने पर 2 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा तय है।

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