लाइफस्टाइल डेस्क। प्रेग्नेंसी का सफर हर महिला के लिए बेहद खास होने के साथ-साथ चुनौतियों से भरा भी होता है। उसमें भी अगर महिला को पहले से कोई शारीरिक समस्या हो या फिर सेहत को अनदेखा कर दिया जाए तो यह जच्चा-बच्चा दोनों पर भारी पड़ सकता है।
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इसी संबंध में हाल ही में द लैंसेट की एक स्टडी सामने आई है, जिसके मुताबिक अगर कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी के शुरुआती महीनों में किसी मानसिक या शारीरिक बीमारी का सामना कर रही हो तो इन मामलों में मिसकैरेज (Miscarriage) का जोखिम बहुत हद तक बढ़ जाता है।
द लैंसेट पब्लिक हेल्थ जर्नल में प्रकाशित एक शोध से पता चलता है कि अगर कोई महिला प्रेग्नेंसी की शुरुआत में ही कई तरह की लंबे समय तक चलने वाली शारीरिक या मानसिक बीमारियों से जूझ रही हो, तो उनमें मिसकैरेज (गर्भपात) का खतरा 20 प्रतिशत और गंभीर मतली और उल्टी का खतरा 69 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। इतना ही नहीं, इस स्टडी में यह भी पता चला है कि जिन महिलाओं को प्रेग्नेंसी शुरू होने से पहले ही दो या उससे अधिक बीमारियां होती हैं, उनमें बेचैनी और अवसाद का खतरा चार गुना अधिक होता है।

यह शोध किंग्स कालेज लंदन की ओर से किया गया। इसमें यह भी पाया गया कि जिन महिलाओं को लंबे समय तक चलने वाली कई बीमारियां थीं, उनमें “वीनस थ्रोम्बोएम्बोलिज्म” का खतरा दोगुने से भी अधिक था और “प्री-एक्लेम्पसिया” यानी प्रेग्नेंसी के दौरान हाई ब्लड प्रेशर का खतरा 42 प्रतिशत अधिक था, जबकि ऐसी बीमारियां न होने वाली महिलाओं में यह खतरा कम था।
हर अतिरिक्त बीमारी के साथ जटिलताओं का खतरा बढ़ता हुआ पाया गया। उदाहरण के लिए, जिन महिलाओं को तीन या उससे अधिक बीमारियां थीं, उनमें “वीनस थ्रोम्बोएम्बोलिज्म” का खतरा उन महिलाओं की तुलना में साढ़े तीन गुना से भी अधिक था जिन्हें लंबे समय तक चलने वाली कोई बीमारी नहीं थी।
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