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रविवार, अगस्त 16, 2026

पीरियड्स शुरू होते ही क्यों होती है चॉकलेट की क्रेविंग? समझें हार्मोन्स का वो खेल…

लाइफस्टाइल डेस्क। पीरियड्स (periods) के दिनों में चॉकलेट या कोई मीठी चीज खाना आम बात है पर ज्यादातर लड़कियां और महिलाएं इसका कारण नहीं जानतीं। वो बस जानती है तो बस उस क्रेविंग को, जिसे कुछ मीठा खाकर ही शांत किया जा सकता है। चलिए पीरियड्स और महिलाओं की क्रेविंग से जुड़े इस साइंस के बारे में जानते हैं।

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कुछ न कुछ खाने की तीव्र इच्छा जिसे हम आम बोलचाल में क्रेविंग कहते हैं, का सीधा संबंध शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलावों से है। खासतौर से तब जब पीरियड्स शुरू हुए हों तो यह इच्छा ज्यादा बढ़ जाती है। दरअसल सेक्स हार्मोन जैसे प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्राडिओल में तेजी से उतार-चढ़ाव, ब्लड शुगर की स्टेबिलिटी कम हो जाना, सेराटोनिन एक्टिविटी का कम होना, घ्रेलिन और लेप्टिन जैसे भूख से जुड़े हार्मोन में बदलाव होना इसके लिए जिम्मेदार हैं।

शरीर में होने वाले ये सभी बदलाव किसी खास तरह के फूड के लिए हमारी क्रेविंग बढ़ा देते हैं, जिसकी वजह से हमें चॉकलेट और चीजकेक जैसी मीठी चीजों की क्रेविंग ज्यादा होती है। पीरियड्स के दौरान शरीर की रेस्टिंग एनर्जी नीड्स यानी बुनियादी आवश्यकताएं बढ़ जाती है। ऐसे में शरीर को काम करने के लिए कैलोरी की खास जरूरत होती है। फिर अपने पसंदीदा फूड्स के बारे में ज्यादा सोचना हमें उन्हें खाने के लिए मजबूर कर देता है।

चॉकलेट में शुगर, कार्ब्स, कैफीन के साथ मैग्नीशियम, ट्रिप्टोफैन, थियोब्रोमाइन और फेनिलएथिलामाइन जैसे पोषक तत्व होते हैं। पीरियड्स में इन सभी पोषक तत्वों की शरीर में खास कमी महसूस होती है।

सेरोटोनिन एक फील गुड हार्मोन है, जिसे हम हैप्पी हार्मोन के नाम से भी जानते हैं। पीरियड्स के ल्यूटियल फेज यानी शुरू होने से 5-10 दिन पहले यह हार्मोन कम होने लगता है। ऐसे में मीठी चीजें इंस्टेंट मूड बूस्टर का काम करती हैं, फिर चाहे हम खमियाजा हमें आलस और सुस्ती के रूप में ही क्यों न भुगतना पड़े।

Tag: #nextindiatimes #chocolate #periods

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