डेस्क। बीते 15 अगस्त को देश ने अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाया। इस दौरान पीएम मोदी से संबोधन से पहले राष्ट्रगीत वंदे मातरम बजाया गया और फिर पीएम ने राष्ट्रध्वज फहराया जिसके बाद राष्ट्र गान जन गण मन गाया गया। वंदे मातरम में मूल तौर पर छह अंतरे हैं, लेकिन लंबे वक्त से सार्वजनिक कार्यक्रमों में इसके पहले दो अंतरे ही गाए जाते हैं। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर किसने इसके बाकी के चार अंतरे हटा दिए और इसके पीछे की वजह क्या रही?
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बंकिम चंद्र चटोपाध्याय के मूल वंदे मातरम (Vande Mataram) में गीत के शुरुआती दो अंतरे पूरी तरह से भारत माता की प्राकृतिक सुंदरता, हरियाली और मातृभूमिकी वंदना पर आधारित गीत हैं। इसके बाद के अंतरों में देवी दुर्गा, लक्ष्मी और साहित्यिक कृति आनंदमठ के धार्मिक संदर्भ आते हैं। साल 1937 में मुस्लिम लीग और अन्य कई पक्षों ने इन धार्मिक प्रतीकों पर अपनी असहमति जताई थी। तब देश में किसी भी तरह के मतभेद से बचने के लिए और विविधता को बनाए रखने के लिए कांग्रेस ने एक समिति बनाई थी।

तत्कालीन परिस्थितियों में सर्वसम्मति बनाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने रवींद्रनाथ टैगोर और महात्मा गांधी से परामर्श किया था। दोनों नेताओं की सलाह पर यह निर्णय लिया गया कि सार्वजनिक मंचों और राष्ट्रीय आयोजनों में केवल शुरुआती दो पदों का ही इस्तेमाल किया जाएगा क्योंकि ये पंक्तियां किसी भी धार्मिक प्रतीक से परे पूरी तरह धर्मनिरपेक्ष थीं। इस कदम का मुख्य उद्देश्य देश के सभी समुदायों को एक साथ जोड़कर रखना और सांप्रदायिक सौहार्द को बनाए रखना था।
आजादी के बाद वर्ष 1950 में जब भारत का संविधान लागू हुआ, तब संविधान सभा ने राष्ट्रीय प्रतीकों की स्थिति स्पष्ट की। ‘जन गण मन’ को देश का आधिकारिक राष्ट्रगान चुना गया, जबकि ‘वंदे मातरम’ के पहले दो छंदों को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया गया। उस समय दोनों को समान आदर और स्थान देने की बात कही गई, जिससे देश के सरकारी प्रोटोकॉल में धर्मनिरपेक्षता और राष्ट्रीय एकता का संतुलन पूरी तरह बना रहे।
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