36.6 C
Lucknow
बुधवार, अगस्त 12, 2026

मानसून की उमस में डिहाइड्रेशन का खतरा, थकान और चक्कर को न करें नजरअंदाज

लाइफस्टाइल डेस्क। जब बात dehydration की हो तो ज्यादातर लोग इसे केवल गर्मियों की समस्या मानते हैं जबकि यह मानसून के दिनों में भी उतना ही आम रहता है। पानी की कमी को कुछ लोग सामान्य मानकर हल्के में लेते हैं और केवल पानी की कमी बताकर स्वयं इलाज कर लेते हैं लेकिन डिहाड्रेशन से न केवल पाचन तंत्र कमजोर होता है बल्कि शरीर में पोषक तत्वों का अवशोषण भी सही ढंग से नहीं हो पाता।

यह भी पढ़ें-शरीर से पानी चूस लेते हैं ये फूड्स, गर्मियों में भूलकर भी न खाएं

तेज धूप वाली गर्मी की तुलना में उमस भरी गर्मी ज्यादा खतरनाक होती है। जहां धूप वाली गर्मी में पसीना जल्दी सूख जाता है तो गर्मी से राहत मिल सकती है, लेकिन उमस भरी गर्मी में पहले से ही हवा में नमी होने से पसीना आसानी से नहीं सूखता। इससे डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ सकता है। साथ ही शरीर तापमान नियंत्रित करने के लिए लगातार पसीना बनाता रहता है, पर मानसून में प्यास कम लगती है पर शरीर से पसीना बहता रहता है, पर लोग पानी का सेवन व जरूरी इलेक्ट्रोलाइट की कमी का ध्यान नहीं रख पाते और पानी की कमी का शिकार हो जाते हैं।

बारिश के मौसम में डिहाइड्रेशन का जोखिम पैदा करने वाले अन्य कारण भी होते हैं। इस मौसम में वायरल संक्रमण की समस्या आम हो जाती है। साथ ही डायरिया और फूड प्वाइजनिंग का भी खतरा रहता है। ये समस्याएं भी शरीर में पानी की कमी का खतरा बढ़ा सकती हैं, इसलिए केवल पानी पीना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है।

बचाव के लिए जरूरी सलाह:

-प्यास न लगने पर भी समय-समय पर पानी व इलेक्ट्रोलाइट्स की थोड़ी मात्रा लेते रहें।
-इलेक्ट्रोलाइट्स के लिए ओआरएस का घोल ले सकते हैं।
-अगर उल्टी, दस्त आदि की समस्या है तो चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।
-घर पर नारियल पानी, ओआरएस, छाछ, नींबू पानी और ताजे फलों का सेवन करना चाहिए।

Tag: #nextindiatimes #dehydration #health

RELATED ARTICLE