एंटरटेनमेंट डेस्क। सिनेमा ने दोस्ती पर कई यादगार गाने दिए हैं जो साल-दर-साल भी कल्ट बने हुए हैं। इन्हीं में से एक गाना 53 साल पहले आया था जो आज दोस्ती का सबसे बड़ा एंथम बन गया है। यह एक कव्वाली गीत था, जो किसी हीरो नहीं बल्कि खलनायक पर फिल्माया गया था। उर्दू में लिखे गए कल्ट क्लासिक गीत के बोल, सिंगर की बुलंद आवाज और खलनायक के डांस ने इस कव्वाली को हमेशा-हमेशा के लिए अमर बना दिया।
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यह कव्वाली सच्ची दोस्ती और वफादारी की मिसाल देती है। 70 के दशक में बना ये गीत (song) आज भी हर पीढ़ी के दिलों में अपनी खास जगह रखता है। जिस गीत की हम बात कर रहे हैं, वो है ‘जंजीर’ का गाना ‘यारी है ईमान मेरा यार’ (Yaari Hai Imaan Mera Yaar Song) है।

इस कव्वाली को सिनेमा के सबसे खूंखार खलनायकों में शुमार प्राण (Pran) पर फिल्माया गया था। जंजीर में वह जुए का अड्डा चलाने वाले शेर खान की भूमिका में होते हैं। पुलिस इंस्पेक्टर के रोल में अमिताभ बच्चन से लड़ाई के बाद शेर खान यानी प्राण को उनके प्रति सम्मान भी महसूस होने लगता है और फिर दोनों दोस्त बन जाते हैं। दोस्ती के बाद ही यह कव्वाली आती है।
इस कव्वाली को मन्ना डे की बुलंद आवाज ने और भी खूबसूरत बना दिया। गान के बोल गुलशन बावरा ने लिखे जबकि गाने की धुन आनंद-कल्याण ने तैयार किए थे। जिस तरह गाने के बोल, धुन और आवाज छा गई, उसी तरह लाल दाढ़ी, पठानी कुर्ता और अफगानी अंदाज में प्राण ने भी सबका दिल जीत लिया। ‘यारी है ईमान मेरा यार’ को बने 53 साल हो गए हैं, लेकिन आज भी इस गीत की दीवानगी खत्म नहीं हुई है। आज भी लोग अपने यारों के लिए यह गीत गुनगुनाते हैं।
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