एंटरटेनमेंट डेस्क। हिंदी सिनेमा में कई ऐसी फिल्में बनी जिनके बनने के पीछे की कहानी दिलचस्प रही है। भले ही आज फिल्मों में सीक्वल, प्रीक्वल या फिर रीमेक जैसी फिल्में आती हों, लेकिन एक वक्त था जब गांव-कस्बों से कहानियां निकलती थीं और पर्दे पर पहुंचती थीं। आज बात एक ऐसी नौटंकी की, जिस पर फिल्म बनी और हिट हुई।
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दरअसल आज जिस फिल्म की हम बात कर रहे हैं, उस फिल्म का नाम है तीसरी कसम। जी हां, साल 1966 में आई फिल्म ‘तीसरी कसम’ (Teesri Kasam) आई और इस फिल्म में मुख्य किरदारों में राज कपूर (Raj Kapoor) और वहीदा रहमान (Waheeda Rehman) नजर आए थे। फिल्म की चर्चा असल में इसलिए भी ज्यादा हुई, क्योंकि यह फिल्म एक नौटंकी पर बनी थी।

फणीश्वरनाथ ‘रेणु’ की कहानी ‘मारे गए गुलफाम’ पर यह फिल्म (movie) आधारित थी। इस फिल्म को महान गीतकार शैलेंद्र ने अपनी जिंदगी की जमापूंजी लगाकर बनाया था। गीतकार शैलेंद्र ने अपनी जिंदगी की सारी कमाई इस फिल्म को बनाने में लगा दी थी। हालांकि फिल्म वह कमाल करके नहीं जिसकी उम्मीद थी।
यह पहली बार था जब राज कपूर और वहीदा रहमान ने एक साथ काम किया था। फिल्म को बासु भट्टाचार्य ने डायरेक्ट किया था और गीतकार शैलेंद्र ने इसे बनाया था। इस फिल्म का संगीत शंकर-जयकिशन ने तैयार किया था। सजन रे झूठ मत बोलो, पान खाये सैंया हमारो.. ऐसे कई गाने थे जो हिट रहे। फिल्म के गानों को मुकेश, मन्ना डे और आशा भोसले ने आवाज दी थी। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप रही थी। भले ही फिल्म फ्लॉप रही हो, लेकिन फिल्म को कल्ट क्लासिक फिल्मों में शुमार किया जाता है।
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