36.4 C
Lucknow
रविवार, अगस्त 2, 2026

सिगरेट नहीं पीते फिर भी हो सकता है फेफड़ों का कैंसर! समझें इसके छुपे हुए कारण

लाइफस्टाइल डेस्क। किसी से अगर यह सवाल किया जाए कि फेफड़ों का कैंसर क्यों होता है तो उनका जवाब हमेशा धूम्रपान होगा। लोगों के मन में इसे लेकर जो धारणा बन गई है, वही फेफड़ों के कैंसर का खतरा भी उतना ही बढ़ा रही है क्योंकि सभी को लगता है कि जो स्मोकिंग करता है उसे ही यह जानलेवा बीमारी हो सकती है।

यह भी पढ़ें-सेफ नहीं है हर्बल सिगरेट! तंबाकू से भी ज्यादा खतरनाक हो सकता है इसका धुआं

सालों तक सूक्ष्म प्रदूषित कणों (PM), वाहनों के धुएं, इंडस्ट्री से होने वाले उत्सर्जन और निर्माण कार्यों से होने वाली धूल-मिट्टी के बीच रहना फेफड़ों को कमजोर कर देता है। अगर आप किसी बड़े शहर में रहते हैं तो यह सभी चीजें स्मोकिंग के ही बराबर हैं। वहीं, दूसरी हमारे घर का वातावरण भी फेफड़ों के लिए नुकसानदायक है, इनमें सेकंड हैंड स्मोक, बायोमास कुकिंग फ्यूल, किचन का खराब वेंटिलेशन और केमिकल से संपर्क में आना जैसी बातें शामिल हैं।

फेफड़ों के कैंसर (lung cancer) के लक्षण बहुत कम ही दिखाई देते हैं, लेकिन जब दिखते हैं तो बीमारी शरीर में फैल चुकी होती है। हफ्तों तक खांसी न जाना, खांसी के समय खून आना, अचानक से वजन कम होना, सीने में दर्द और बार-बार होने वाला इन्फेक्शन और सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण संकेत हैं जिसे अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। ज्यादातर मामलों में मरीज मेरे पास तब आता है जब कैंसर बन चुका होता है।

मिनीमली इनवेसिव सर्जरी, कैंसर की पहचान करने के बेहतर टूल्स, दवाएं, और इम्यूनोथेरेपी के जरिए इसकी रोकथाम की जा सकती है। जिन लोगों को ज्यादा खतरा है, खासकर धूम्रपान करने वाले लोग हर साल लो डोज सिटी स्कैन करवाकर इसके जोखिम से बच सकते हैं। ऐसा करने से बीमारी का इलाज ठीक समय पर किया जा सकता है।

Tag: #nextindiatimes #lungcancer #Health #smoke

RELATED ARTICLE