डेस्क। एटीएम बैंकिंग इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धि है। एटीएम के जरिए आप कही से भी आसानी से पैसे निकाल सकती हैं। आइए जानते हैं कि एटीएम पिन क्यों 4 अंक के ही होते हैं। जॉन ने एटीएम मशीन का अविष्कार साल 1969 में किया था। वहीं आज के जमाने में लोग डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल काफी ज्यादा करने लगे हैं। अब बात करते हैं कि आखिर एटीएम का पिन कोड 4 ही अंकों का क्यों रखा गया।
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दरअसल, जॉन जब ATM मशीन बनाकर इसमें कोडिंग सिस्टम लगा रहे थे, तो जॉन शुरू में इसे 6 अंकों का करना चाहते थे। ऐसे में उन्होंने अपनी पत्नी को इसका इस्तेमाल करने को कहा। ऐसे में जॉन ने देखा की उनकी पत्नी लास्ट को 3 डिजिट भूल जाती थी। ऐसे में जॉन ने 6 की जगह 4 अंक का पिन रखा ताकि लोग पीन को भूल ना पाएं।
इसके बाद जॉन ने एटीएम से 6 अंक के पिन को हटाकर 4 अंक का पिन लगा दिया। 4 अंकों के एटीएम पिन 0000 से 9999 के बीच होते हैं जिससे अलग-अलग 10000 पिन नंबर बनाए जा सकते हैं। 4 अंक के पिन को हैक करना इतना आसान नहीं होता है। ऐसे में 4 अंक के पिन लोग जल्दी भूलते भी नहीं हैं।

एटीएम का इस्तेमाल आज इस कदर बढ़ चुका है कि दुनिया में 3.2 मिलियन से भी ज्यादा एटीएम हैं। सबसे ज्यादा एटीएम चीन में हैं। वहीं एटीएम से पैसा निकालने पर भारी फीस चुकानी होती है। बाकी देश के मुकाबले भारत में काफी कम लागत लगती हैं कैश निकालने के लिए।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ATM PIN कभी भी जन्मतिथि, मोबाइल नंबर या 1234 जैसे आसान नंबरों पर आधारित नहीं होना चाहिए। PIN किसी के साथ साझा नहीं करना चाहिए और उसे कागज या मोबाइल नोट्स में भी नहीं लिखना चाहिए। समय-समय पर PIN बदलना और ATM पर PIN डालते समय कीपैड को हाथ से ढकना भी अच्छी सुरक्षा आदत मानी जाती है।
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