36.6 C
Lucknow
शुक्रवार, जुलाई 10, 2026

जब पैसों की जगह कर्मचारियों को मिलता था नमक, ऐसे हुई ‘सैलरी’ शब्द की शुरुआत

डेस्क। हर महीने सैलरी आने का इंतजार लगभग हर नौकरी करने वाले व्यक्ति को रहता है। यही सैलरी घर का बजट चलाती है, जरूरी खर्च पूरे करती है और फ्यूचर योजनाओं को पूरी करने में मदद करती है और आर्थिक सुरक्षा देती है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस सैलरी शब्द को हम रोज सुनते और बोलते हैं, उसकी शुरुआत आखिर कहां से हुई?

यह भी पढ़ें-यहां से आया ATM मशीन का आईडिया, जानें किसने किया था अविष्कार

आज नमक हर रसोई में आसानी से मिल जाता है लेकिन पहले के समय में इसकी कीमत बहुत ज्यादा थी। उस दौर में नमक केवल खाने का टेस्ट बढ़ाने के लिए ही नहीं, बल्कि फूड प्रोडक्ट्स को लंबे समय तक सुरक्षित रखने और शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराने के लिए भी बेहद जरूरी माना जाता था। नमक आसानी से उपलब्ध नहीं होता था। इसे दूर-दराज के इलाकों से लाया जाता था, इसलिए इसकी कीमत भी काफी ज्यादा थी। यही वजह थी कि कई जगहों पर नमक का इस्तेमाल मुद्रा यानी भुगतान के रूप में भी किया जाता था।

प्राचीन रोमन साम्राज्य में सैनिकों को उनकी सेवाओं के बदले जो भुगतान दिया जाता था, उसे सैलेरियम कहा जाता था। उस समय कई सैनिकों को नकद या सोने-चांदी की जगह नमक (salt) के रूप में मेहनताना दिया जाता था। इसी सैलेरियम शब्द से आगे चलकर अंग्रेजी का सैलरी शब्द बना, जिसका इस्तेमाल आज वेतन या तनख्वाह के लिए किया जाता है।

रिपोर्ट के अनुसार, रोमन इतिहासकार प्लीनी द एल्डर ने अपनी बुक Natural History में लिखा है कि प्राचीन रोम में सैनिकों को उनके काम के बदले नमक दिया जाता था। इसी परंपरा से सैलरी शब्द की शुरुआत मानी जाती है। कई अध्ययनों में यह भी बताया गया है कि Soldier शब्द लैटिन भाषा के Sal Dare से जुड़ा माना जाता है, जिसका मतलब नमक देना बताया गया है। वहीं रोमन भाषा में नमक के लिए सैलेरियम शब्द का इस्तेमाल होता था, जिससे आगे चलकर सैलरी शब्द बना।

Tag: #nextindiatimes #salt #salary

RELATED ARTICLE