लाइफस्टाइल डेस्क। अस्थमा (Asthma) के इलाज में इस्तेमाल होने वाले इनहेलर जहां मरीजों के लिए जीवनरक्षक साबित होते हैं। इस संबंध में एक नए शोध ने इनके लंबे उपयोग को लेकर उनकी चिंता बढ़ा दी है। इस नतीजों में पाया गया कि इनहेलर का उपयोग करने वाले अस्थमा मरीजों में सर्जरी के बाद जटिलताएं अधिक देखी गईं।
यह भी पढ़ें-गठिया के शुरुआती लक्षणों को न करें अनदेखा, हाथ-पैरों में दिखते हैं ये संकेत
इनमें से 19.7 प्रतिशत मरीजों को दो साल के भीतर दोबारा सर्जरी करानी पड़ी, जबकि पांच साल में यह आंकड़ा 26.3 प्रतिशत तक पहुंच गया। इसके विपरीत, इनहेलर नहीं लेने वाले अस्थमा मरीजों में यह दर काफी कम रही। शोध के अनुसार, स्टेराइड का लंबे समय तक उपयोग हड्डियों की मजबूती को प्रभावित कर सकता है, जिससे रीढ़ की सर्जरी के बाद हड्डियों के जुड़ने की प्रक्रिया धीमी या कमजोर हो सकती है।

मेडिकल रिपोट्र्स से पता चलता है कि जब तापमान बढ़ता है, तो हवा में ओजोन और पार्टिकुलेट मैटर का स्तर भी बढ़ जाता है, जो फेफड़ों में सूजन और सांस लेने में तकलीफ पैदा करता है। ये सभी फैक्टर मिलकर अस्थमा मरीजों के लिए ट्रिगर का काम करते हैं। इसके अलावा गर्मी में डिहाइड्रेशन, इलेक्ट्रोलाइट्स असंतुलन व थकान के कारण भी सांस की तकलीफ बढ़ सकती है।
रिलीवर इनहेलर (नीला पफर) का बार-बार उपयोग करने से घबराहट, बेचैनी, तेज धड़कन (Tachycardia) और कंपन महसूस हो सकती है। स्टेरॉयड इनहेलर (कंट्रोलर) के कारण गले में खराश, आवाज बैठना (Hoarseness), और मुंह या गले में फंगल इन्फेक्शन (कैंडिडायसिस) हो सकता है। कभी-कभी मांसपेशियों में ऐंठन, सिरदर्द या सीने में तकलीफ महसूस हो सकती है। यदि रिलीवर इनहेलर पर अत्यधिक निर्भरता है (महीने में 3-4 से अधिक बार इस्तेमाल), तो अस्थमा का दौरा पड़ने और मृत्यु का जोखिम बढ़ सकता है।
Tag: #nextindiatimes #Asthma #Health #Lifestyle




