बंगाल। पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत हासिल की है। ‘पालटानो दरकार, चाई बीजेपी सरकार’ (पलटना जरुरी है, भाजपा की सरकार चाहिए)। Bengal में भाजपा की प्रचंड जीत में इस नारे ने भी अहम भूमिका निभाई। इसने सीधे लोगों के दिमाग पर स्ट्राइक किया। उन्हें परिवर्तन के बारे में सोचने को बाध्य किया। मतदान से पहले बहुतों की जुबां पर यह नारा चढ़ गया था।
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महिलाएं इस चुनाव में निर्णायक भूमिका में रहीं। टीएमसी की योजनाओं और भाजपा के सुरक्षा व सम्मान के मुद्दों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। बंगाल से बाहर काम करने वाले लाखों लोगों का वोट इस बार अहम रहा। रोजगार के मुद्दे और ‘सोनार बांग्ला’ का विजन इन मतदाताओं को प्रभावित करता दिखा। उत्तर 24 परगना समेत कई इलाकों में मतुआ वोट निर्णायक रहा। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लेकर इस समुदाय की उम्मीदें भाजपा के पक्ष में जाती दिखीं।

2026 के चुनावों में ‘एम फैक्टर’ (संभवतः मोदी, ममता बनाम भाजपा या अन्य स्थानीय कारक) के साथ भाजपा ने राज्य में एक मजबूत बढ़त हासिल की है, जिसने ममता के ‘खेला’ को उल्टा कर दिया। पार्टी के निचले स्तर तक सांगठनिक ढांचे को मजबूत करने और जनसंपर्क बढाने में स्थानीय भाजपा नेताओं ने मुख्य भूमिका निभाई।
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, राज्य में मतदाताओं के ध्रुवीकरण ने भी भाजपा की जीत में अहम रोल अदा किया, जिससे पार्टी ने बहुमत प्राप्त किया। नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी को पराजित करने और भाजपा की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए इन्हें प्रमुख नेता के रूप में देखा जा रहा है। इसके अलावा, चुनाव परिणामों में कई हाई-प्रोफाइल सीटों पर भाजपा के उम्मीदवारों ने ममता बनर्जी की टीएमसी को कड़ी टक्कर दी, जिससे राज्य में पहली बार भाजपा की सरकार बनने की संभावना प्रबल हुई।
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