डेस्क। जब भी आप कोई मैसेज भेजते हैं या फिर वीडियो स्ट्रीम करते हैं तो आपका Internet डेटा शायद सेटेलाइट के जरिए नहीं बल्कि समुद्र के नीचे हजारों किलोमीटर का सफर तय कर रहा होता है। असल में दुनिया का लगभग 95% से 99% इंटरनेट ट्रैफिक समुद्र की तलहटी पर बिछाई गई सबमरीन केबल्स के जरिए ही गुजरता है। आइए जानते हैं इन्हें पानी के नीचे ही क्यों बिछाया जाता है और ये खराब क्यों नहीं होती?
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दरअसल जमीन पर केबल्स को कंस्ट्रक्शन के काम, खुदाई और इंसानी दखल से लगातार खतरा बना रहता है। पानी के नीचे काफी कम हलचल होती है। महाद्वीपों को आपस में जोड़ने के लिए काफी ज्यादा दूरी तय करनी पड़ती है। समुद्र के पार केबल्स बिछाना अक्सर सबसे छोटा और सबसे किफायती रास्ता होता है।
सबमरीन फाइबर ऑप्टिक केबल्स डेटा को काफी ज्यादा रफ्तार से भेजती हैं। ये सेटेलाइट के मुकाबले कहीं ज्यादा तेज होती है और उनमें डेटा पहुंचने में भी कम समय लगता है।ये केबल्स इंजीनियरिंग का एक काफी बेहतरीन नमूना है। इनके बीच में नाजुक कांच के फाइबर होते हैं लेकिन उनके चारों तरफ सुरक्षा की कई परतें होती हैं। इनमें स्टील, तांबा और गहरे समुद्र के बाहरी दबाव को झेलने के लिए एक मजबूत भारी कोटिंग शामिल है।

पानी को अंदर जाने से रोकने के लिए केबल पर पेट्रोलियम जेली जैसे पदार्थ की कोटिंग की जाती है। यह वाटरप्रूफ रुकावट का काम करती है। प्लास्टिक की बाहरी परत नमक से होने वाले जंग से बचाती है। समुद्र की गहराइयों में दबाव काफी ज्यादा होता है और स्थितियां काफी ज्यादा मुश्किल होती हैं। इन केबल्स को खास तौर पर इसी दबाव को झेलने के लिए डिजाइन किया गया है।
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