41 C
Lucknow
Friday, April 24, 2026

भारत में परिवारवाद की राजनीति का बोलबाला, जानें किस पार्टी में ज्यादा हावी?

नई दिल्ली। भारत की राजनीति में परिवारवाद यानी एक ही परिवार के कई सदस्यों का सत्ता और टिकट पर असर, लंबे समय से बहस का मुद्दा रहा है। खासकर कांग्रेस पर यह आरोप ज्यादा लगता है, लेकिन 2024 के बाद नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली बीजेपी भी इस बहस से पूरी तरह बाहर नहीं है। आइए जानें कि किस पार्टी में परिवारवाद (Nepotism) ज्यादा हावी है?

यह भी पढ़ें-जानें किस प्रधानमंत्री ने किए सबसे ज्यादा विदेश दौरे? चर्चा में रहा था यह नाम

कांग्रेस में परिवारवाद की चर्चा सबसे ज्यादा इसलिए होती है क्योंकि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर नेहरू-गांधी परिवार का दशकों से प्रभाव रहा है। आजादी के बाद से जवाहरलाल नेहरू से शुरू होकर इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और फिर सोनिया-राहुल-प्रियंका तक यह सिलसिला लगातार बना रहा है। इसी वजह से कांग्रेस पर टॉप लेवल फैमिली कंट्रोल का आरोप सबसे ज्यादा लगता है।

कांग्रेस में सिर्फ केंद्रीय नेतृत्व ही नहीं बल्कि राज्यों में भी कई जगह बाप-बेटा या रिश्तेदारों को टिकट मिलने के उदाहरण मिलते हैं। 2024 के कर्नाटक चुनाव में कई सीटों पर ऐसे उम्मीदवार उतारे गए जो किसी न किसी राजनीतिक परिवार से जुड़े थे। यह ट्रेंड बताता है कि पार्टी में जमीनी स्तर पर भी परिवार आधारित राजनीति मजबूत बनी हुई है।

बीजेपी में परिवारवाद का असर राष्ट्रीय स्तर पर कम दिखता है, लेकिन राज्य और स्थानीय स्तर पर इसका दायरा बढ़ा है। कई जगह पुराने नेताओं के बेटे-बेटियों को टिकट दिया गया, खासकर वहां जहां परिवार का स्थानीय प्रभाव मजबूत है। इससे यह साफ होता है कि जीत की संभावना के हिसाब से पार्टी भी व्यावहारिक फैसले ले रही है। बीजेपी के सहयोगी दलों में परिवारवाद और ज्यादा खुलकर दिखता है। हालांकि यह कहना कि सिर्फ एक ही पार्टी में परिवारवाद है, पूरी तरह सही नहीं होगा।

Tag: #nextindiatimes #Nepotism #BJP #Congress

RELATED ARTICLE

close button