लाइफस्टाइल डेस्क। इन दिनों दिल की बीमारी एक गंभीर समस्या बन चुकी है। दुनिया भर में कई लोग इसकी वजह से अपनी जानें गंवा रहे हैं। चिंता की बात यह है कि अब युवा भी तेजी से इसका शिकार होने लगे हैं। हाल ही में कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स (खून में फैट) को कंट्रोल करने के लिए नई गाइडलाइन्स जारी किए हैं।
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अब ‘खराब’ यानी बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL-C) को पहले से भी कम रखने पर जोर दिया गया है। नए नियम के मुताबिक डॉक्टर्स का नया मंत्र “जितना कम, उतना बेहतर” है। नई गाइडलाइन्स के तहत कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) लेवल के रेंज में भी बदलाव किया गया है। इसके मुताबिक LDL का टारगेट हर व्यक्ति के अपने रिस्क लेवल पर निर्भर होगा।

जिन लोगों हार्ट डिजीज नहीं है, उन्हें LDL 100 mg/dL से कम रखना है। हार्ट डिजीज का मीडियम रिस्क है, उन्हें LDL 70 mg/dL से कम रखना है। जिन्हें हार्ट डिजीज का ज्यादा रिस्क है, उन्हें 55 mg/dL से कम रखना है। नई गाइडलाइन्स में यह भी कहा गया कि हेल्दी लाइफस्टाइल इलाज की पहली शर्त है। हालांकि, इन सबके बाद भी अगर इससे कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल नहीं होता, तो अब डॉक्टर पहले के मुकाबले जल्दी दवा शुरू करने की सलाह देते हैं।
आमतौर पर बात जब भी ‘कोलेस्ट्रॉल’ या ‘हार्ट टेस्ट’ की होती है, तो हमारा ध्यान घर के बड़े-बुजुर्गों या 30 की उम्र पार कर चुके लोगों पर जाता है। नए नियम के तहत जिन बच्चों की कोलेस्ट्रॉल की फैमिली हिस्ट्री रही है, अब उन्हें भी 9-10 की उम्र में कम से कम एक बार कोलेस्ट्रॉल चेक कराने की सलाह दी गई है। इसके अलावा 20 की उम्र से लिपिड प्रोफाइल चेक कराएं और हर 4-5 साल में चेक कराते रहें।
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