डेस्क। हर वर्ष की तरह 14 जनवरी 2026 को Makar Sankranti का पर्व पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार इसी दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण का आरंभ होता है।
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उत्तर भारत के कई राज्यों में इस दिन खिचड़ी बनाना, खाना और दान करना एक पुरानी परंपरा है। यही कारण है कि मकर संक्रांति का नाम आते ही खिचड़ी का स्मरण स्वतः हो जाता है। परंपरा के पीछे केवल स्वाद नहीं बल्कि गहरी आस्था और सामाजिक भावना जुड़ी मानी जाती है।

मकर संक्रांति पर खिचड़ी खाने की परंपरा का संबंध बाबा गोरखनाथ से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि एक समय कठिन परिस्थितियों और आक्रमणों के कारण योगी और साधु नियमित रूप से भोजन नहीं बना पाते थे। ऐसे समय में बाबा गोरखनाथ ने दाल, चावल और मौसमी सब्जियों को एक साथ पकाने की सलाह दी। यह भोजन कम समय में तैयार हो जाता था और लंबे समय तक ऊर्जा देता था। धीरे धीरे यह साधारण और पौष्टिक भोजन साधु संतों से समाज तक पहुंचा और मकर संक्रांति से जुड़ गया। तभी से इस दिन खिचड़ी बनाना और ग्रहण करना शुभ माना जाने लगा।
इस दिन किया गया दान विशेष फल देता है। खिचड़ी में प्रयुक्त चावल, दाल और घी को सात्विक आहार माना गया है, जो सूर्य को अर्पित करने के लिए उपयुक्त समझा जाता है। मान्यता है कि मकर संक्रांति पर खिचड़ी का दान करने से ग्रह दोष शांत होते हैं और जीवन में स्थिरता आती है। यही कारण है कि स्नान के बाद खिचड़ी का दान कर उसे प्रसाद रूप में ग्रहण करने की परंपरा बनी।
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