डेस्क। रूस यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine war) के बीच यूक्रेन एक बार फिर से बड़े राजनीतिक बदलाव की तरफ बढ़ रहा है। राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की अपने प्रधानमंत्री यूलिया स्विरिडेंको का इस्तीफा स्वीकार करने के बाद सरकारी फेरबदल का संकेत दिया है। इसी बीच युद्ध के समाप्त होने का कोई भी संकेत नहीं मिल पा रहा है। बार-बार अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के बावजूद भी रूस और यूक्रेन अपनी मूल मांगों पर समझौता करने को तैयार नहीं है।
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युद्ध के सालों तक जारी रहने का एक प्राथमिक कारण कब्जे वाले क्षेत्रों पर असहमति है। रूस जापोरिजिया और खेरसोन के साथ-साथ डोनबास क्षेत्र पर पूरी तरह कंट्रोल बनाए रखने पर जोर देता है। इसी के साथ राष्ट्रपति पुतिन ने बार-बार इन क्षेत्रों को रूस की ऐतिहासिक भूमि का हिस्सा बताया है और उन्हें वापस करने की कोई इच्छा नहीं दिखाई है।
यूक्रेन का यह कहना है कि वह अपने कब्जे वाले किसी भी क्षेत्र पर रूसी कंट्रोल को मानता नहीं देगा। इसी के साथ जेलेंस्की ने कहा है कि यूक्रेन किसी भी शांति समझौते को स्वीकार नहीं कर सकता है जो देश के क्षेत्र का लगभग पांचवा हिस्सा रूसी कब्जे में छोड़ देता है।

सुरक्षा गारंटी बातचीत में एक और बड़ी बाधा बनी हुई है। यूक्रेन का ऐसा कहना है कि भविष्य में किसी भी रूसी आक्रमण को रोकने के लिए नाटो में शामिल होना या फिर पश्चिमी देशों से समकक्ष दीर्घकालिक सैन्य गारंटी प्राप्त करना जरूरी है। दूसरी तरफ रूस यूक्रेन की नाटो सदस्यता को अपनी सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा मानता है। मॉस्को ने बार-बार अपनी सीमाओं की तरफ नाटो के विस्तार को एक लाल रेखा के रूप में बताया है और जोर देकर यह भी कहा है कि यूक्रेन को गठबंधन से बाहर ही रहना चाहिए।
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