स्पोर्ट्स डेस्क। खेल जगत में अधिकांश एथलीटों को ‘डोपिंग टेस्ट’ से गुजरना पड़ता है। वर्ल्ड एंटी डोपिंग एजेंसी (WADA) खासतौर पर ओलंपिक और राष्ट्रमंडल खेलों जैसे बड़े इवेंट्स में ज्यादा सक्रिय दिखाई देती है। Dope Test इसलिए करवाया जाता है जिससे पता लगाया जा सके कि किसी एथलीट ने प्रतिबंधित ड्रग्स का सेवन तो नहीं किया है।
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जांच के लिए एथलीट का पेशाब का सैंपल, ब्लड सैंपल, मुंह की लार या पसीने का सैंपल भी लिया जा सकता है। इसमें पता लगाया जाता है कि किसी एथलीट ने स्टेरॉयड्स, प्रतिबंधित पेन किलर दवाएं, टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने या एनर्जी बढ़ाने वाले ड्रग्स का सेवन तो नहीं किया है। NADA कभी भी किसी समय बिना बताए एथलीट को डोप टेस्ट के लिए नोटिस भेज सकता है। जो भी खिलाड़ी रजिस्टर्ड टेस्टिंग पूल में शामिल हैं, उन्हें NADA को अपनी लोकेशन देनी होगी और परीक्षण के दिन टेस्ट के लिए उपलब्ध रहना होता है।

NADA के नियमों की मानें तो डोप टेस्ट में फेल होने पर किसी एथलीट को 2-4 साल के लिए बैन किया जा सकता है। वहीं बार-बार डोप टेस्ट में फेल होने पर एथलीट को आजीवन प्रतिबंध की सजा भी सुनाई जा सकती है। यह बहुत पुरानी बात नहीं है जब साल 2025 में तमिलनाडु की स्प्रिंटर धनलक्ष्मी शेखर पर 8 साल का बैन लगाया गया था।
भारतीय क्रिकेटर पृथ्वी शॉ भी एक बार डोप टेस्ट में फेल हुए थे। फरवरी 2019 की बात है, जब सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के दौरान पृथ्वी शॉ को एक प्रतिबंधित ड्रग का सेवन करते पकड़ा गया था। बाद में खुलासा हुआ कि शॉ ने गलती से प्रतिबंधित ड्रग का सेवन किया था, फिर भी उन्हें 8 महीने का बैन झेलना पड़ा था।
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