डेस्क। फ्लैश फ्लड यानी अचानक आने वाली बाढ़ (Flash Flood) ऐसी बाढ़ होती है, जो बहुत कम समय में पैदा हो जाती है। कई बार भारी बारिश के बाद कुछ मिनटों या घंटों के भीतर नदियां, नाले और पहाड़ी धाराएं उफान पर आ जाती हैं। इसकी रफ्तार इतनी तेज हो सकती है कि लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचने का समय भी नहीं मिलता।
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सामान्य बाढ़ के मुकाबले फ्लैश फ्लड अधिक खतरनाक मानी जाती है, क्योंकि यह अक्सर बिना ज्यादा चेतावनी के और तेज बहाव के साथ आती है। फ्लैश फ्लड के पीछे कई प्राकृतिक और मानवीय कारण हो सकते हैं:
-जब किसी छोटे इलाके में कुछ घंटों के भीतर बहुत ज्यादा बारिश होती है, तो जमीन पानी को सोख नहीं पाती।
-पहाड़ी क्षेत्रों में क्लाउडबर्स्ट के कारण अचानक बड़ी मात्रा में पानी नीचे की ओर तेजी से बहने लगता है।

-भारी बारिश के कारण छोटी नदियां और मौसमी नाले अचानक खतरनाक रूप ले सकते हैं।
-भूस्खलन से नदी या जलधारा का रास्ता रुक सकता है। जब पानी का दबाव बढ़ने पर यह अवरोध टूटता है, तो नीचे की ओर तेज बाढ़ आ सकती है।
-शहरों में जमीन पर कंक्रीट बढ़ने से बारिश का पानी जमीन में नहीं समा पाता और सड़कों व निचले इलाकों में तेजी से भरने लगता है।

हिमालयी और पहाड़ी क्षेत्रों में ढलान अधिक होने के कारण पानी तेजी से नीचे की ओर आता है। अपने साथ यह मिट्टी, पत्थर, पेड़ और मलबा भी बहा सकता है। यही कारण है कि फ्लैश फ्लड कई बार घरों, सड़कों, पुलों और वाहनों को भी अपने साथ बहा ले जाती है।फ्लैश फ्लड की सबसे बड़ी चुनौती इसकी अचानक आने वाली प्रकृति है। इसलिए मौसम की चेतावनी को गंभीरता से लेना और जोखिम वाले क्षेत्रों में समय रहते सतर्क होना ही जान-माल के नुकसान को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका है।
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