नई दिल्ली। भारत के चुनावी इतिहास में वर्ष 2026 एक ऐसा अध्याय बनकर उभरा है, जिसे भविष्य में जन भागीदारी के सबसे सशक्त उदाहरण के तौर पर याद किया जाएगा। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में हालिया विधानसभा चुनावों (Elections) के दौरान जिस तरह से मतदाताओं ने घरों से निकलकर अपने मताधिकार का प्रयोग किया है, उसने न केवल राजनीतिक पंडितों को हैरान कर दिया है, बल्कि लोकतंत्र की जड़ों को और भी अधिक मजबूत कर दिया है।
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तमिलनाडु में भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहां राज्य की सभी 234 विधानसभा सीटों पर जनता ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। यहां 85.13 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो कि आजादी के बाद का अब तक का उच्चतम आंकड़ा है। असम के चुनावी सफर में 2026 का साल एक मील का पत्थर साबित हुआ है। यहां 85.91 प्रतिशत मतदान के साथ राज्य ने अपने इतिहास में सबसे अधिक वोटिंग का कीर्तिमान स्थापित किया है।

पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेश ने तो वोटिंग के मामले में लगभग शत-प्रतिशत के करीब पहुंचने का प्रयास किया है। साल 2026 में यहां की जनता ने 90 प्रतिशत मतदान करके देश के सामने एक मिसाल पेश की है। 2026 में केरल में 78.27 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया है, जो कि 1987 के बाद का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
नागालैंड में 2023 के दौरान हुए चुनावों में भी वोटिंग का स्तर बहुत ऊंचा रहा था, जहां 85 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं ने अपने अधिकार का प्रयोग किया था। त्रिपुरा ने भी हालिया चुनावों में 86 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज कर देश के शीर्ष चुनावी राज्यों में अपना नाम दर्ज कराया है। त्रिपुरा के मतदाताओं में हमेशा से ही राजनीतिक मुद्दों पर गहन चर्चा और भागीदारी का रुझान रहा है।
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