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शनिवार, जुलाई 11, 2026

मानसून में फूड प्वाइजनिंग से बचना है, तो आज ही बदलें खाने-पीने का यह तरीका

लाइफस्टाइल डेस्क। जहां एक तरफ बारिश गर्मी से राहत दिलाती है तो वहीं वातावरण में बढ़ी हुई नमी हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस को पनपने की जगह भी देती है। डॉक्टर्स का मानना है कि इस मौसम में लोग सबसे ज्यादा बीमार पड़ते हैं, फूड प्वाइजनिंग (food poisoning), टायफाइड और पेट से जुड़ी दिक्कतें बरसात में बेहद आम हैं।

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वैसे तो सलाद सेहत के लिए हेल्दी माना जाता है, लेकिन बारिश के मौसम में कच्ची सब्जियां सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकती हैं। गीली मिट्टी पैथोजेंस को जन्म देती है जिसे पानी से धोकर हटाना भी मुश्किल होता है। इसी वजह से हमेशा स्टीम, पका और उबला हुआ खाने की सलाह दी जाती है। वहीं, उन फलों को खाएं जिन्हें छीला जा सके, जैसे – केला या संतरा। साथ ही, बाहर मिलने वाले कटे हुए फल खाने से भी सख्त परहेज करें।

चाट की गरमा गरम प्लेट भले ही खाने में स्वादिष्ट रखे लेकिन इसमें इस्तेमाल किया जाने वाला पानी ज्यादातर मामलों में शुद्ध नहीं होता। इसमें भी सबसे खराब स्थिति हरी चटनी की होती है क्योंकि उन्हें कच्चा पीसा जाता है और ठंडा ही परोसा जाता है, ऐसे में उसके कीटाणु मर नहीं पाते और बैक्टीरिया को जन्म दे सकते हैं।

मानसून में ज्यादा नमी खाने में होने वाले बैक्टीरिया को जन्म देती है। अगर पका हुआ खाना किचन में 2 घंटे के लिए भी खुला छोड़ दिया जाए तो वह टॉक्सिक हो जाता है। ऐसे में खाने को हमेशा फ्रिज में रखें और खाने से पहले अच्छे से गर्म कर लें।

ऐसा कभी न सोचे कि जो पानी बारिश के मौसम में रेस्टोरेंट में दिया जा रहा है, वह पीने लायक है। अंडरग्राउंड वॉटर के इस मौसम में दूषित होने की संभावना ज्यादा रहती है। हमेशा अपने साथ उबले हुए पानी की बोतल रखें और फिर हमेशा बंद बोतल ही खरीदें।

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