एंटरटेनमेंट डेस्क। हमारे देश में दहेज प्रथा सदियों से समाज का हिस्सा है। यह समाज का एक ऐसा अभिशाप है जिसने ना जाने कितनी बेटियों के सपनों और जिंदगियों को तबाह किया है। भले ही आज एआई का युग है और 21वीं सदी में हम जी रहे हैं, लेकिन दहेज (Dowry System) की बेड़ियों से अबतक हम मुक्त नहीं हो पाए हैं। भारतीय सिनेमा ने समय-समय पर इस गंभीर मुद्दे को बड़े परदे पर उतारकर समाज को आईना दिखाया है।
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इसी का उदाहरण है वो फिल्म जो आज से करीब 76 साल पहले सिनेमा में आई थी। साल 1950 में दहेज प्रथा पर एक फिल्म आई और फिल्म का नाम था ‘दहेज’। शायद ये हिंदी सिनेमा की वो पहली फिल्म थी, जिसने समाज की उस कुरीति को उस दौर में उजागर किया था। लखनऊ की पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म को महान फिल्ममेकर वी.शांताराम (V Shantaram) ने बनाया था। वी.शांताराम हमेशा से ही अलग तरह के सिनेमा के लिए जाने गए लेकिन उन्होंने जब दहेज फिल्म बनाई तो इसकी भी खूब चर्चा हुई।

फिल्म में पृथ्वीराज कपूर मुख्य भूमिका में थे। फिल्म में उन्होंने ठाकुर साहब का किरदार निभाया था। इसके अलावा फिल्म में उनकी बेटी के किरदार में दिखीं अभिनेत्री जयश्री। करण दीवान फिल्म में जयश्री के पति की भूमिका में दिखे। फिल्म में ललिता पवार भी नजर आईं, जिन्होंने एक बेहद ही क्रूर सास का किरदार निभाया था। वहीं फिल्म में अभिनेता उल्हास ललिता पवार के पति की भूमिका में नजर आए थे। फिल्म की कहानी दिल को छू लेने वाली थी।
इस फिल्म की कहानी एक बूढ़े बाप की होती है, जो अपनी बेटी चंदा (जयश्री) की शादी एक वकील के बेटे के साथ कर दी जाती है। ससुराल पहुंचने पर, दहेज न लाने के कारण चंदा की सास (ललिता पवार) और परिवार के अन्य सदस्य उसे ताने मारते हैं और प्रताड़ित करने लगते हैं। इस फिल्म में ललिता पवार (Lalita Pawar) ऐसी क्रूर सास बनीं, कि इस फिल्म के बाद उन्हें टाइपकास्ट कर दिया गया। उन्हें सिनेमा में फिर ऐसे ही निगेटिव रोल्स ज्यादा ऑफर किए गए। दहेज प्रथा पर इसके अलावा कई और फिल्में भी बनीं, जो आज भी चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
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