डेस्क। विज्ञान के एक बेहद सामान्य से सिद्धांत ने इस ऐतिहासिक टॉवर में एक ऐसा अनोखा जादू जोड़ दिया है, जिससे इसकी ऊंचाई कभी कम तो कभी ज्यादा हो जाती है। करीब 41 सालों तक पूरी दुनिया की सबसे ऊंची मानव निर्मित संरचना का ताज पहनने वाले इस टॉवर की कुल ऊंचाई 1,083 फीट है। आइए, इस आर्टिकल में जानते हैं कि आखिर यह विशालकाय टॉवर मौसम के साथ अपना आकार बदलता कैसे है।
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यह जानकर आपको शायद हैरानी हो कि हर साल एफिल टॉवर की ऊंचाई में लगभग 15 सेंटीमीटर तक का उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है।
गर्मियों का असर: जब गर्मियों में पेरिस शहर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, तब यह टॉवर 12 से 15 सेंटीमीटर तक लंबा हो जाता है।
सर्दियों का असर: वहीं दूसरी तरफ, जब सर्दियां आती हैं और तापमान में गिरावट दर्ज की जाती है, तो इसकी ऊंचाई कुछ सेंटीमीटर तक कम हो जाती है।

इस अनोखे बदलाव के पीछे जो मुख्य कारण छिपा है, उसे विज्ञान की भाषा में ‘थर्मल एक्सपेंशन’ यानी ‘ऊष्मीय प्रसार’ कहा जाता है। प्राथमिक कक्षाओं में हम सभी ने इस सिद्धांत के बारे में पढ़ा है कि जब भी किसी पदार्थ का तापमान बढ़ता है, तो वह फैलने लगता है और ठंड के मौसम में वह सिकुड़ जाता है।
चूंकि, एफिल टॉवर (Eiffel Tower) पूरी तरह से लोहे से बना हुआ है, इसलिए गर्मी पड़ने पर इसका लोहा फैलता है और टॉवर थोड़ा ऊंचा हो जाता है। वैसे तो यह वैज्ञानिक बदलाव दुनिया की हर वस्तु में होता है, लेकिन एफिल टॉवर इतना विशाल है कि इसमें होने वाला सूक्ष्म बदलाव भी कुछ सेंटीमीटर का हो जाता है, जिसे आसानी से नापा जा सकता है। विज्ञान के इन दिलचस्प पहलुओं के साथ-साथ, यह शानदार इमारत आज भी हर साल लाखों पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है।
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