डेस्क। दुनिया भर में इथेनॉल (Ethanol) के इस्तेमाल का बदलाव तेजी से हो रहा है। जैसे-जैसे भारत E20 पेट्रोल का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा रहा है कई गाड़ी मालिकों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या एथेनॉल मिश्रित ईंधन सिर्फ भारत में ही इस्तेमाल होता है। आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे का सच?
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ब्राजील, पैराग्वे, थाईलैंड, बोलिविया और जिम्बाब्वे जैसे देशों ने पहले ही अलग-अलग रूपों में E20 या उससे ज्यादा इथेनॉल वाले फ्यूल को अपना लिया है। जबकि अमेरिका ने फ्लेक्स फ्यूल गाड़ियों के लिए E85 का बड़ा नेटवर्क बनाया है। भारत भी इसे तेजी से अपनाने वाले देशों में शामिल हो चुका है।
भारत ने ‘बायोफ्यूल पर नेशनल पॉलिसी’ के तहत 2030 की तय समय सीमा से कई साल पहले ही पूरे देश में 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग (E20) का लक्ष्य हासिल कर लिया है। अब रिटेल फ्यूल स्टेशनों पर E20 स्टैंडर्ड पेट्रोल ही बेचा जा रहा है। भारत में इथेनॉल ब्लेंडिंग की दर एक दशक से कुछ ज्यादा समय पहले सिर्फ 1.5% थी, जो अब बढ़कर 20% हो गई है। साथ ही, देश की भारी ईंधन मांग को पूरा करने के लिए घरेलू इथेनॉल प्रोडक्शन कैपेसिटी भी लगभग 5 गुना बढ़ गई है।

भारत अपने कच्चे तेल का लगभग 88% इम्पोर्ट करता है, जिससे वह ग्लोबल प्राइस में उतार-चढ़ाव और जियो-पॉलिटिकल उथल-पुथल के प्रति संवेदनशील हो जाता है। हर लीटर पेट्रोल में से एक-पांचवें हिस्से की जगह घरेलू स्तर पर बने इथेनॉल का इस्तेमाल करने से आयात पर निर्भरता कम होती है। विदेशी मुद्रा की बचत होती है। किसानों को मदद मिलती है। साथ ही, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होती है। हालांकि, 20% के स्तर को पार करने के लिए एक स्टरॉन्ग एग्रीकल्चर सप्लाई चेन और फ्लूल इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े निवेश की जरूरत होती है। दुनिया के बहुत कम देश ही इस स्तर तक पहुंच पाए हैं, जिससे ग्लोबली, भारत की यह उपलब्धि खास बन जाती है।
इथेनॉल-ब्लेंडेड फ्यूल पेट्रोल और एथिल अल्कोहल का मिक्सचर है। “E” रेटिंग फ्यूल में इथेनॉल की प्रतिशत मात्रा बताती है। उदाहरण के लिए, E20 में 20% इथेनॉल और 80% पेट्रोल होता है। इथेनॉल का प्रोडक्शन पौधों से मिलने वाली शर्करा और स्टार्च, जैसे गन्ना, मक्का और अनाज के फर्मेंटेशन से किया जाता है। इथेनॉल में ऑक्सीजन होता है, इसलिए यह ईंधन को पूरी तरह से जलने में मदद करता है, जिससे कार्बन मोनोऑक्साइड और पार्टिकुलेट मैटर जैसे प्रदूषकों का उत्सर्जन कम होता है।
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