नई दिल्ली। देश में लगातार हो रही परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों और पेपर लीक के मामलों ने अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले लिया है। छात्रों के हक में आवाज उठाने के लिए Cockroach Janata Party ने प्रदर्शन का एलान किया है। इस विरोध प्रदर्शन के जरिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की जा रही है। इसी बीच आइए समझते हैं कि ऐसी रैलियों के लिए पुलिस और प्रशासन से मंजूरी कैसे ली जाती है?
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भारत का संविधान हर नागरिक को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का मौलिक अधिकार देता है, लेकिन इसके लिए स्थानीय प्रशासन से लिखित अनुमति या नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) लेना बेहद जरूरी होता है। चूंकि कानून और व्यवस्था पूरी तरह से राज्य सरकार का विषय है, इसलिए आयोजकों को सबसे पहले संबंधित क्षेत्र के थाना अध्यक्ष (SHO) या सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) के पास जाना होता है।
इसके अलावा अपनी सुरक्षा व्यवस्था और रूट की मंजूरी के लिए पुलिस उपायुक्त (DCP) के कार्यालय में औपचारिक आवेदन देना पड़ता है। आज के आधुनिक दौर में प्रदर्शन की मंजूरी लेने की प्रक्रिया को काफी हद तक डिजिटल और आसान बना दिया गया है। देश के कई राज्यों में अब पुलिस विभाग ने इसके लिए ऑनलाइन मोड की शुरुआत कर दी है।
कोई भी नागरिक या संस्था अपने राज्य के पुलिस विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या फिर नागरिक सेवा पोर्टल (जैसे सर्विस ऑनलाइन पोर्टल) के माध्यम से घर बैठे इस अनुमति के लिए आवेदन कर सकती है। इस ऑनलाइन व्यवस्था से कागजी कार्रवाई में लगने वाला समय काफी कम हो गया है।

यदि आपका प्रदर्शन किसी सड़क या पुलिस क्षेत्राधिकार के अलावा किसी सार्वजनिक पार्क, मैदान या नगर निगम की संपत्ति पर होने वाला है, तो नियम थोड़े बदल जाते हैं। ऐसी स्थिति में आयोजकों को संबंधित स्थानीय नगर निगम या उस जमीन के वास्तविक मालिक विभाग से अलग से लिखित परमीशन लेनी पड़ती है। जब तक नगर निगम और पुलिस विभाग दोनों की तरफ से हरी झंडी नहीं मिल जाती, तब तक किसी भी सार्वजनिक स्थल पर टेंट लगाने या लाउडस्पीकर का उपयोग करने की कानूनी अनुमति नहीं मिलती है।
प्रशासन को दिए जाने वाले आवेदन में आयोजकों को कई महत्वपूर्ण कड़ियों का साफ-साफ ब्योरा देना पड़ता है। इसमें सबसे पहले आयोजन का मुख्य उद्देश्य बताना होता है कि प्रदर्शन किस विषय पर है। इसके साथ ही प्रदर्शन शुरू होने और समाप्त होने की तारीख व सटीक समय की जानकारी देनी होती है। यदि कोई रैली निकाली जा रही है, तो उसका पूरा मार्ग (Route) बताना अनिवार्य है। इसके अलावा भीड़ की अनुमानित संख्या, आयोजक का नाम, पता, फोन नंबर, आईडी प्रूफ और प्रदर्शन में इस्तेमाल होने वाले नारों व पोस्टरों का विवरण भी देना होता है।
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