लाइफस्टाइल डेस्क। भारत में हर साल अंग न मिल पाने के कारण लगभग 5 लाख से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा देते हैं। मौतों के इस इतने बड़े आंकड़े के पीछे का मुख्य कारण है- समाज में जागरूकता की कमी और कई तरह के भ्रम। अगर आपको diabetes या हाई ब्लड प्रेशर जैसी कोई समस्या है, तो मुमकिन है कि इसका असर आपकी किडनी पर पड़ा हो, लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि आपके शरीर के बाकी अंग भी अस्वस्थ हैं।
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आपके अन्य अंग जैसे लिवर, दिल, फेफड़े और आंखें पूरी तरह से स्वस्थ हो सकती हैं और किसी जरूरतमंद की जान बचाने के काम आ सकती हैं। इसे मेडिकल भाषा में ‘ऑर्गन-स्पेसिफिक इवैल्यूएशन’ कहा जाता है। आपकी मौजूदा बीमारियों के आधार पर आपको पहले से ही अंगदान के लिए ‘अयोग्य’ नहीं माना जा सकता। जब किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है, तब मेडिकल विशेषज्ञों की एक पूरी टीम ब्लड टेस्ट और ऑर्गन फंक्शन की जांच करती है।

इस जांच के बाद केवल उन्हीं अंगों को निकाला जाता है, जो मरीज के लिए 100% सुरक्षित और स्वस्थ पाए जाते हैं। मेडिकल दिशा-निर्देशों के मुताबिक केवल 2 से 3 ही ऐसी गंभीर स्थितियां हैं, जिनमें अंगदान पूरी तरह से वर्जित है:
-एक्टिव मेटास्टेटिक कैंसर यानी ऐसा कैंसर जो शरीर में फैल चुका हो
-गंभीर एक्टिव इंफेक्शन, जैसे कि एक्टिव सेप्सिस
इन गंभीर स्थितियों को छोड़कर, अगर किसी व्यक्ति ने पहले कैंसर या किसी अन्य बड़ी बीमारी का इलाज कराया है और वह अब स्वस्थ हो चुका है, तो वह भी मृत्यु के बाद अपने अंगों या टिशू का दान कर सकता है।
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