धार। हाईकोर्ट ने लंबे समय से चले आ रहे भोजशाला मंदिर कमाल मौला मस्जिद विवाद में एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने भोजशाला परिसर (Bhojshala) को मूल रूप से एक हिंदू मंदिर के तौर पर मान्यता दे दी है। यह फैसला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट पर आधारित था।
यह भी पढ़ें-कौन है बिहार का सबसे पढ़ा लिखा नेता, जानें नीतीश कुमार की शिक्षा
मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला देश के सबसे चर्चित ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों में गिनी जाती है। भोजशाला का इतिहास परमार वंश के प्रसिद्ध शासक राजा भोज से जुड़ा हुआ है। राजा भोज का शासनकाल लगभग 1000 ईस्वी से 1055 ईस्वी तक माना जाता है। वे मालवा क्षेत्र के सबसे विद्वान और शक्तिशाली राजाओं में गिने जाते हैं।
इतिहासकारों के मुताबिक राजा भोज ने उज्जैन से राजधानी हटाकर धार को शिक्षा, कला और संस्कृति का बड़ा केंद्र बनाया था। उन्हें केवल योद्धा राजा ही नहीं बल्कि महान विद्वान और शिक्षा प्रेमी शासक भी माना जाता है।ऐसा कहा जाता है कि कमाल मौला कई सालों तक भोजशाला परिसर के पास ही रहे थे। उनकी मृत्यु के बाद इस परिसर के पास ही एक मजार बनाई गई।

धीरे-धीरे मुस्लिम समुदाय के कुछ हिस्सों ने इस संत के साथ क्षेत्र के जुड़ाव की वजह से इस जगह को कमाल मौला मस्जिद कहना शुरू कर दिया। बाद में यह दोहरी पहचान भारत के सबसे संवेदनशील ऐतिहासिक और धार्मिक विवादों में से एक का केंद्र बन गई। हिंदू इस जगह को एक प्राचीन सरस्वती मंदिर मानते हैं वहीं मुस्लिम इस संरचना के कुछ हिस्सों को कमाल मौला से जुड़ी एक मस्जिद परिसर के रूप में पहचानते हैं। ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स और एएसआई के सर्वे के मुताबिक भोजशाला परिसर में लगातार आक्रमण और सल्तनत काल के दौरान बड़े ढांचागत बदलाव हुए।
Tag: #nextindiatimes #Bhojshala #MadhyPradesh




